कालांवाली।किन्नू के बाग का निरीक्षण करते हुए बागवानी व कृषि अधिकारी। विज्ञप्ति
कालांवाली। गांव सिंघपुरा में प्रगतिशील किसान मास्टर जगदीश सिंह के खेत में शुक्रवार को कृषि विभाग एवं बागवानी विभाग की ओर से किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें फल उत्कृष्टता केंद्र से विशेषज्ञ डॉ. रिंकू रानी ने बताया कि परंपरागत खेती को छोड़कर किसान बागवानी की ओर बढ़ रहे हैं।
किसान अब प्राकृतिक खेती के तरीके नई सरकारी योजनाएं देश में कम लागत में अधिक पैदावार की तलाश में किसान अब रासायनिक खेती से हटकर प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ रहे हैं। इस दिशा में हरियाणा प्रदेश एक मिसाल बनकर उभरा है। यहां नेचुरल फार्मिंग ने न केवल खेती की लागत घटाई है, बल्कि इससे मिट्टी की सेहत और फसलों की गुणवत्ता में भी सुधार हो रहा है।
राज्य के हजारों किसान अब गोबर, गोमूत्र और जैविक घोलों से खेती कर पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भर कृषि की राह पर अग्रसर हैं। हालांकि, रासायनिक खेती को छोड़कर प्राकृतिक खेती की तरफ मुड़ रहे हैं। इस मौके पर गदराना के प्रगतिशील किसान तेजा सिंह, बागवानी विभाग से अमी लाल, जसपाल कौर, बलजीत सिंह, गुरमीत सिंह देसू मलकाना, अमरेंद्र सिंह, मलकीत सिंह, बग्गू शर्मा व अन्य मौजूद रहे।
बिना खाद व स्प्रे का किन्नू में होता है जूस ज्यादा
मास्टर जगदीश सिंह के खेत में लगे किन्नू के बाग का निरीक्षण करने के दौरान डॉ. रिंकू रानी ने कहा कि बिना खाद व स्प्रे के खेती कर रहें है जो कि काफी फायदेमंद है। बिना खाद व स्प्रे के तैयार किया किन्नू खाने में मिठास व जूस ज्यादा होता है। किसानों को चाहिए कि इस तरह की प्राकृतिक खेती की ओर ध्यान दे ताकि बीमारियों से बचा जा सके। कृषि अधिकारी रमेश सहु ने इस किसान गोष्ठी का फसल प्रबंधन और आय बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा हो सके इसका मुख्य लक्ष्य है। सरकार की ओर से किसानों को आधुनिक तरीके से जोड़कर उनके आय और पैदावार को बढ़ाना है उन्नत बीज संतुलित खाद सही सिंचाई और आधुनिक मशीनों के उपयोग सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई ताकि किसान सरकारी योजनाओं का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठा सके। किसान रासायनिक खाद का कम उपयोग जैविक खेती और पराली प्रबंधन पर जोर दिया गया।