सिरसा। उप मंडल कृषि अधिकारी कार्यालय के परिसर में बुधवार को जिला स्तरीय किसान मेला आयोजित किया गया। इसमें कई विभागों और कंपनियों ने स्टॉल लगाए। इनमें किसानों को मशीनरी से लेकर बागवानी और मोटा अनाज उत्पादन की तकनीकी जानकारी दी गई।
बड़े स्तर पर आयोजित इस मेले में किसानों को सोलर प्लांट, ड्रोन स्प्रे सिस्टम, मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन, जैविक सब्जियां उगाने की जानकारी दी गई। वहीं किसानों ने मोटा अनाज बेचने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। मेले में जिलेभर के एक हजार किसानों ने भाग लिया। कई किसानों ने अपने अनुभव साझा किए।
गांव राजपुरा साहनी के किसान बलवीर सिंह ने विभाग के सहयोग से शहद का स्टॉल लगाया। बताया कि उन्होंने विभाग के सहयोग से वर्ष 2007 में मधुमक्खी के 10 बॉक्स खरीदकर शहद उत्पादन व्यवसाय शुरू किया था। अब वह 500 बॉक्स से शहद का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने किसानों को जांटी, बेरी, सरसों आदि के बारे में बताया। कहा कि मधुमक्खी परागण में भी मददगार हैं। इसलिए वह जिस खेत में बॉक्स लगाते हैं, उस खेत में पैदावार अधिक होती है।
कैथल जिले के गांव गढ़ी नजीर के किसान बलवंत सिंह ने इस कार्यक्रम में मिट्टी के मोती के नाम से स्टॉल लगाया है। उन्होंने वर्ष 2017 में दो एकड़ जमीन में मोटे अनाज की खेती शुरू की। मोटे अनाज से मुनाफे के साथ सेहत का भी अनमोल खजाना मिला। उन्होंने किसानों को बासमती, ज्वार आटा, हरी कंगनी, देसी मक्का, अल्सी, चना, सामा बीज, कुटकी बीज, रागी, बाजरा की जानकारी दी। कहा कि स्वस्थ रहने के लिए इस अनाज का प्रयोग हमें करना पड़ेगा। इस अनाज में कीटनाशक का प्रयोग भी बहुत कम होता है। इससे मिट्टी की सेहत भी बनी रहती है।
गांव तारूआना से पहुंचे किसान अमृत सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में पहुंचकर बहुत खुशी हुई। विभाग की तरफ से किसानों के लिए अच्छा प्रयास किया है। इस कार्यक्रम में कई स्टाॅल देखने के लिए मिले। सरकार किसानों के लिए सोलर सिस्टम लाई है, वह काफी अच्छा है। कई उपकरण खरीदने के लिए सरकार किसानों को अनुदान भी दे रही है।
गांव चौबूर्जा से आए किसान बलराम ने बताया कि इस कार्यक्रम में कई विभागों की ओर से स्टॉल लगाए गए थे। इन पर जाकर काफी कुछ सीखने का मौका मिला। उन्होंने फल, सब्जियां, शहद उत्पादन की जानकारी ली। विभाग किसानों को पराली प्रबंधन के लिए भी सहयोग कर रह है। यह प्रयास काफी सराहनीय है। प्रकृति को बचाने के साथ किसानों को जैविक खेती भी बढ़ानी चाहिए।