elementary language teaching is being provided in 102 primary schools
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स्कूलों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए शिक्षा विभाग ने सिरसा ब्लॉक के 102 प्राइमरी स्कूलों में पहली कक्षा के बच्चों के लिए प्रारंभिक भाषा शिक्षण के अंतर्गत, लार्निंग लैंग्वेज फाउंडेशन, एलएलएफ प्रोग्राम चला रखा है। जो बच्चों को प्रारंभिक भाषा और साक्षरता कौशल सीखने का आधार बना रहा है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत पहली कक्षा के बच्चों को विभिन्न क्रियाओं के माध्यम से हिंदी वर्ण अक्षर, शब्द ओर वाक्य को पढ़ना सिखाया जाता है। प्रारंभिक भाषा और साक्षरता कौशल के लिए स्कूलों में अलग से पुस्तकें भी दी जा रही है। एलएलएफ की तरफ से दी जाने वाली पुस्तकों में वर्ण, अक्षर, कविता व कहानियों को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया होता है। ताकि बच्चे उसमें दिलचस्पी लेकर पढ़े व जल्दी सीखे। इस प्रोग्राम के अंतर्गत पहली कक्षा को पढ़ाने वाले शिक्षकों को साल में दस दिन की ट्रेनिंग तीन चरणों में दी जाती है। जिसमें पहला चरण मौखिक, दूसरा चरण डी-कोडिंग व तीसरा चरण वर्ण में शब्दों और वाक्य को बनाकर पढ़ना, लिखना, बोलना सिखाते है। कक्षा पहली को पढ़ाने वाले शिक्षकों को यह ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे बच्चे हिंदी का सही उच्चारण व प्रयोग कक्षा एक से ही सीख सके और परीक्षा परिणामों के साथ साथ बच्चों की हिंदी भाषा पर पकड़ बेहतर बन सकें।
एलएलएफ जिला संयोजक जितेंद्र नेगी ने बताया कि प्रारंभिक भाषा और साक्षरता कौशल स्कूलों में भविष्य के सभी सीखने के आधार है। बच्चों का शुरूआती वर्षों में अच्छी तरह से विकास नहीं किया गया तो बच्चों को पढ़ाए जाने वाले पाठ्यक्रम उनके लिए और जटिल बन जाएंगे। इसलिए छात्रों में शुरूआती साक्षरता कौशल विकसित करने के लिए शिक्षण को मजबूत करना महत्तवपूर्ण है। एलएलएफ प्रोग्राम के माध्यम से यहीं कौशल बच्चों में उत्पन्न किया जा रहा है। यह प्रोग्राम हरियाणा के सात जिलों में चल रहा है। यह जुलाई माह में जिले के सिरसा ब्लॉक में शुरू किया गया है। एलएलएफ प्रोग्राम के अंतर्गत जुलाई माह में 123 प्रथम कक्षा के शिक्षकों यह ट्रेनिंग दी गई थी। साथ ही अवलोकण के लिए 15 एबीआरसी व 4 बीआरपी को भी प्रशिक्षित किया गया है। ताकि वे शिक्षकों को प्रशिक्षित कर सकें। हर महीने शिक्षकों की समीक्षा बैठक ली जाती है। जिससे आगे की शेड्यूल व अन्य प्वाइंट पर चर्चा होती है। कक्षाओं को रोचक बनाकर सिखाने के प्रयास पर बल दिया जा रहा है। बच्चों को शिक्षण देने के लिए कक्षाओं को चार्ट, पोस्टर के माध्यम से आकर्षित बनाया जा रहा है। जिससे बच्चों के सीखने की लालसा बढ़ती है। साथ ही प्रत्येक स्कूल में लाइब्रेरी बनाने के लिए बहुत सारी कहानी की किताबें दी गई हैं।