संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। सरकार की सख्ती और जिला प्रशासन की सतर्कता के चलते इस बार पराली जलाने के मामलों में पिछले चार सालों के मुकाबले करीब 91 फीसदी की कमी आई है। कृषि विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2021 में पराली जलाने के जहां 640 मामले आए थे, जोकि 2024 में अब तक 58 ही मामले आए हैं।
पराली जलाने के मामलों में पिछले कुछ वर्षों से लगातार कमी दर्ज की जा रही है। साल 2023 में जहां हरसेक से पराली जलाने की 89 लोकेशन विभाग को प्राप्त हुई थी, इस बार 58 ही प्राप्त हुई है। इनमें से 70 फीसदी पर पराली जली हुई भी नहीं मिली। इसका सर्वे प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी कर रहे हैं। इस साल पिछले चार सालों में सबसे कम पराली जलाने के मामले आए हैं। पराली जलाने पर इस वर्ष 21 किसानों पर एफआईआर भी दर्ज की जा चुकी है।
विभाग के अधिकारियों की माने तो हरसेक की 70 फीसदी लोकेशन गलत पाई गई है। हालांकि घग्गर बेल्ट के रकबे को लेकर प्रशासन की चिता बनी हुई है। इसलिए दिन रात प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार आदि ग्रामीणों को जागरूक करते हुए नजर आते हैं।
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पराली जलाने के मामले
वर्ष : 2021
- कुल मामले : 640
- किसानों पर जुर्माना : 9 लाख रुपये
वर्ष 2022
कुल मामले : 356 मामले
जुर्माना : 4 लाख 62 हजार 500 रुपये।
वर्ष 2023
कुल मामले - 163
जुर्माना - दो लाख 25 हजार।
12 नवंबर 2024
हरसेक से लोकेशन मिली 58
अब तक एफआईआर हुई - 21
किसानों पर जुर्माना लगा - 37500 रुपये
- सीधे प्राप्त हुई शिकायत - 7
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जागरूकता व प्रबंधन पर किया फोकस
अधिकारियों की माने तो किसानों में जागरूकता आई है। वे पराली के इस्तेमाल के विकल्प खोज रहे हैं, जिससे मुनाफा हो सके। पराली प्रबंधन पर सरकार भी एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि किसान को दे रही है। पराली की खरीद के लिए ईंट भट्ठे के कारोबारी व अन्य प्रोडक्ट बनाने वाली एजेंसियां सामने आई हैं। राजस्थान के व्यापारी भी पशुओं के चारे के लिए पराली की खरीद कर रहे हैं।
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प्रदूषण बोर्ड की टीमें फील्ड में उतरीं
प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड के आरओ यानी रीजनल ऑफिसर डॉ. विनोद बाल्यान अपनी टीम के साथ फील्ड में नजर आते हैं। हरसेक की लोकेशन की जांच के साथ ग्रामीणों को जागरूक करने का काम टीम कर रही है। डॉ. विनोद बाल्यान ने बताया कि किसानों को जागरूक करने के सकारात्मक परिणाम मिल रहे हैं। एसडीओ डॉ. रूचि, हरि प्रसाद की टीम फील्ड में निरंतर कार्य कर रही है। रंगड़ी खेड़ा और केलनियां में जाकर किसानों को जागरूक किया गया था। किसानों का पूर्ण सहयोग टीम का मिल रहा है।
पराली जलाने के मामले पिछले वर्षों के मुकाबले अभी तक बहुत कम है। किसानों में जहां जागरूकता आई है, वहीं सरकार की सख्ती भी कारगर साबित हो रही है। 290 गांवों में टीमों का गठन किया गया है। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों की मेहनत का परिणाम है। - डॉ. सुखदेव सिंह, उप निदेशक कृषि विभाग।