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Sirsa News: नशा पीड़ित युवक की इलाज के दाैरान मौत

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रोड़ी। रोड़ी में रविवार को उपचार के दौरान फौजी सिंह (22) की मौत हो गई। पिता की मौत के बाद गम में गए युवक ने नशे का सहारा लिया और अब कम उम्र में जान गंवानी पड़ी। परिजनों ने युवक की मौत होने पुलिस को सूचित किया और कागजी प्रक्रिया में वक्त लगने के चलते रविवार को पोस्टमार्टम नहीं हो पाया।
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अब 17 नवंबर को युवक का पोस्टमार्टम होगा। वहीं, रोड़ी क्षेत्र में नशे से डेढ़ माह में यह तीसरी मौत है। रोड़ी थाने से जांच अधिकारी देवेंद्र कुमार का कहना है कि युवक की मौत उपचार के दौरान हुई है। शव को नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम के लिए रखवाया गया है। परिजनों के बयानों के आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।

फौजी सिंह गांव रोड़ी का रहने वाला था। फौजी सिंह दो भाईयों में छोटा था और अविवाहित था। वह लंबे समय से चिट्टे का नशा करता था। वह दिहाड़ी मजदूरी करता था। मृतक के चाचा गुरतेज सिंह ने बताया कि फौजी अपने पिता की मौत के बाद मानसिक रूप से भी कमजोर हो गया था।वह धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में चला गया।
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गुरतेज सिंह ने बताया कि
कुछ दिन पहले उसने बाजू में नशे का इंजेक्शन लगाया था। वह गलत तरीके या ओवरडोज हो गया था। इस कारण तेजी से उसकी बाजू में इंफेक्शन फैलने लगा और धीरे धीरे उसकी हालत बिगड़ती चली गई। परिवार उसे कई निजी अस्पतालों में ले गया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण उसे सिरसा नागरिक अस्पताल रेफर कर दिया गया। शनिवार रात स्थिति ज्यादा खराब हो गई और रविवार सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

नशे के कारण शरीर में खून सूख गया

चाचा गुरतेज सिंह ने बताया कि चिकित्सकों ने उन्हें बताया कि फौजी सिंह के नशा करने की आदत के कारण उसमें खून की कमी होती गई। नशे के कारण शरीर से खून सूख गया है। फौजी सिंह लंबे समय से नशा कर रहा था। इस कारण उसके यह हालात हो गए। बहुत बार प्रयास किए थे कि किसी तरह से वह नशा छोड़ दे, लेकिन उससे यह आदत नहीं छूटी, अब वह दुनिया ही छोड़ गया।



परिजनों ने पुलिस को दी शिकायत

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 8 नवंबर को रोड़ी में श्री गुरु तेग बहादुर के प्रकाश पर्व पर हुए कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान पूर्व सरपंच ने नशा बढ़ने व मौत का मामला उनके समक्ष उठाया था। मुख्यमंत्री ने उन्हें कहा था कि वह नशा बेचने वालों के खिलाफ शिकायत करें। पुलिस कार्रवाई करेगी। इसी आश्वासन के बाद अब नशे से मौत होने के बाद परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाने का निर्णय लिया है। परिजन अब पुलिस को बताएंगे कि फौजी सिंह को कौन नशा देता था। वहीं, अब पुलिस के लिए भी चैलेंज रहेगा कि गरीब वर्ग के लोगों को नशे में कौन धकेल रहा है और उस पर कैसे नकेल कसी जाए। लोगों का कहना है कि नशे के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ बैठकों तक सीमित है, जबकि असल में नशा तस्करों पर नकेल कसने की कोई ठोस रणनीति जमीनी स्तर पर दिखाई नहीं दे रही।
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