हरियाणा के सिरसा में जगमालवाली डेरा के प्रमुख संत बहादुर चंद उर्फ वकील साहिब को डेरे के अंदर बिश्नोई रीति-रिवाज के अनुसार मिट्टी दी गई। अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों से अनुयायी आए हुए थे। सभी अनुयायी की आंखें नम थीं और अपने गुरु के अंतिम दर्शन को लेकर व्याकुल थे। इस दौरान महिला अनुयायियों के आंसू नहीं थम रहे थे।
डेरा प्रमुख को मिट्टी देने के बाद भी उनकी समाधि को निहारते हुए अनुयायी नजर आए। हर अनुयायी के दिल में जहां डेरा प्रमुख के जाने का गम था। वहीं नया प्रमुख कौन होगा, यह सवाल उठ रहा था। डेरे के अनुयायियों की भावनाओं को कोई सोशल मीडिया आदि के माध्यम से आहत न कर पाए और विवाद न हो इसलिए डेरा प्रमुख को मिट्टी देने के एक घंटे बाद तक डेरे में इंटरनेट सेवा बंद रही।
डेरा प्रमुख वकील साहिब के बेटे ओमप्रकाश व उनके भाई बुधराम बिश्नोई डेरे में पहुंचे। डेरा प्रमुख के बेटे ओमप्रकाश ने हाथ जोड़कर साध संगत को सांत्वना दी। वहीं पुलिस ने डेरे के अंदर कटीले तारों से अलग-अलग सुरक्षा लेयर बनाई हुई थी। जिससे कोई विवाद पैदा न हो।
महिला अनुयायियों के नहीं रुके आंसू
डेरे में आईं महिला अनुयायियों के आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। संत वकील साहिब को सभी याद कर रही थी। हर किसी को उनके जाने का गम था। इतना ही नहीं, डेरे के अनुयायी पुलिस कर्मी भी डेरा प्रमुख को श्रद्धांजलि देते हुए दिखाई दिए। एसपी विक्रांत भूषण ने भी वकील साहिब को मिट्टी दी।
हर नाके और डेरे पर तैनात रही पुलिस
1 डेरे के सभी मार्गों पर पुलिस गश्त करती रही।
2 पुलिस ने हर नाके पर वाहनों की जांच की।
3 डेरे के अंदर भी पुलिस बल और आरएएफ मौजूद रही।
4 एडीजीपी, तीन एसपी, 12 डीएसपी ड्यूटी पर तैनात रहे ।
5 डेरे में हजारों की संख्या में श्रद्धालु आए।
दूसरा पक्ष नहीं आया नजर
गद्दी को लेकर वसीयत पेश करने वाले पक्ष के लोग डेरा प्रमुख की अंतिम यात्रा में नहीं दिखे। डेरा प्रमुख के भतीजे अमर सिंह जरूर नजर आए। डेरा प्रमुख के करीब रहने वाले कई अनुयायी नजर नहीं आए। आठ अगस्त को होने वाले भंडारे के बाद की स्थिति को लेकर पुलिस प्रशासन सतर्क है।
संत वकील साहिब ने जीवनभर लोगों की सेवा की। बुराइयों से दूर करने को लेकर उपदेश दिए। इसी कारण उनके पार्थिव शरीर के दर्शन करने के लिए हजारों की तादाद में लोग यहां आए है और अपने श्रद्धासुमन अर्पित कर रहे हैं। वकील साहिब का जाना समाज को एक बड़ा घाटा है। बाबा जी से मिलता रहता था उनके पास न तो कोई धागा था न ताबीज था। वह बस यही कहते थे कि नाम जपो। सिमरण करो। ऐसे सच्चे संत को ढूंढना बेहद मुश्किल है।
-अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, सांसद, पंजाब
संत वकील साहिब हर व्यक्ति को अच्छे कर्मों की तरफ लेकर जाने का मार्ग दिखाते थे। उनका चोला छोड़ना बेहद दुखद है। उनका जाना अनुयायियों के साथ देश व प्रदेश के लिए क्षति है। ऐसे महापुरुष कभी-कभी पैदा होते है। ऐसे संत का जाना बहुत दुखदायी है।
-शीशपाल केहरवाला, विधायक, कालांवाली
डेरा प्रमुख वकील साहिब मेरे गांव से थे। उन्होंने डेरे की परंपरा को कायम रखा था और समाज में उन्होंने बदलाव लाने का कार्य किया। मैं भी डेरे में आता रहा हूं और उनसे मिलता रहा हूं। वह हमेशा मेरी प्रेरणा रहे। डेरे में बीते दिन हुआ विवाद दुखदायी था। मेरा यही मानना है कि डेरे के अनुयायी स्वयं डेरा प्रमुख का चयन करें और वकील साहिब को सच्ची श्रद्धांजलि दे।
- रवि चौटाला, इनेलो नेता।
वकील साहिब हमेशा लोगों की भलाई की बात करते थे और उन्हें सदमार्ग दिखाते थे। बचपन से उनके बारे में सुना है कि किस प्रकार वकील साहिब लोगों को सच्चाई व सद्गुणों का मार्ग दिखाते थे। आज बड़े दुख का दिन है।
-अर्जुन चौटाला, इनेलो नेता
डेरा प्रमुख का जाना समाज के लिए बड़ी क्षति है। वह समाज को रूहानियत का रास्ता दिखा रहे थे और सिमरण से जोड़ते थे।
-डॉ. अजय सिंह चौटाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, जननायक जनता पार्टी