फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sirsa News: कठपुतली का खेल दिखा शिक्षा की अलख जगा रहीं दिव्यांग अनीता

Wed, 30 Aug 2023 11:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
विज्ञापन
कठपुतली के माध्यम से राजकीय स्कूल में बच्चों को समझातीं बीआरपी अनीता छाबड़ा।  स्रोत : स्वयं
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन




सिरसा। बोल रे...कठपुतली डोरी कौन संग बांधे डोर बॉलीवुड फिल्म का गाना शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने इसे नहीं सुना होगा। ऐसी ही डोर अनीता छाबड़ा अपने संग बांधी है। स्वयं दिव्यांग होने के बाद भी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ रही हैं। इसके लिए वह बच्चों को बड़े ही रोचक तरीके से पढ़ाती हैं। अनीता अपनी इस खूबी के दम पर हर साल 25 से 30 ड्रॉप आउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ रही हैं।

शिक्षा विभाग में बतौर बीआरपी अनीता छाबड़ा सामान्य बच्चों के अलावा विशेष तौर पर दिव्यांग बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। वह स्कूलों में जाकर विद्यार्थियों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनती हैं। वहीं इसी के साथ जो विद्यार्थी स्कूल में नहीं आते हैं, उनके घरों में जाकर विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों को जागरूक करती हैं। ताकि अभिभावक विद्यार्थियों को स्कूल में भेजें। वहीं इसी के साथ हर साल 25 से 30 ड्रॉप आउट बच्चों को शिक्षा से जोड़ती हैं।
विज्ञापन




अनीता बताती है कि कुछ लोग ऐसे होते हैं जो स्कूल में नाम लिखवाने के बाद भी अपने बच्चों को नहीं भेजते हैं। ऐसे में उन्हें समझाना बहुत मुश्किल हो जाता है। लेकिन कोशिश करने से अभिभावक मान जाते हैं।

शिक्षा को रोचक बनाने के लिए कठपुतली का लिया सहारा



शिक्षा की अलख जगाने के दौरान अनीता ने अलग-अलग माध्यमों का सहारा लिया। इनमें से एक माध्यम अनीता कठपुतली को बनाया। बच्चों को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के लिए वह उन्हें कठपुतली का खेल दिखातीं है। इसी के माध्यम से वह बच्चों में शिक्षा के प्रति रूचि पैदा कर रही हैं। वह बच्चों को कठपुतली के माध्यम से आसान व रोचक तरीके से पढ़ाती हैं।

बच्चे के फटी शर्ट ने शुरू करवाया अभियान

अनीता ने बताया कि एक दिन वो राजकीय स्कूल में भ्रमण के लिए गई। इस दौरान किसी बच्चे से उन्होंने कुछ प्रश्न पूछे। उस बच्चे ने बड़ी उत्सुकता से जवाब देने के लिए अपना हाथ उठाया। जब उसे खड़ा किया गया तो उसका आत्मविश्वास डगमगा गया और वो अपनी शर्ट को पकड़े खड़ा रहा। क्योंकि उसकी शर्ट के सारे बटन टूटे हुए थे। इस स्थिति को देखकर उन्होंने सुई धागा जोड़ो अभियान की शुरूआत की। जिसके तहत वो प्रत्येक स्कूल में जाकर सुई धागा देकर आती है और स्वयं भी बच्चों की ड्रेस चेक करती हैं।
विज्ञापन





पढ़ाने के तरीके कर रहीं विकसित

अनीता इन दिनों एक प्रोजेक्ट तैयार कर ही हैं। जिससे शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने में बहुत सहायता मिलेगी। इस प्रोजेक्ट के तहत वो पढ़ाई को आसान और आकर्षक बनाने के लिए विशेष तरीके तैयार कर रही हैं। जिससे अंग्रेजी, गणित, विज्ञान विषय शामिल हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें