विजिलेंस टीम ने लघु सचिवालय में जिला राजस्व अधिकारी के रीडर श्रवण कुमार को चार हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। इसका पता चलते ही लघु सचिवालय में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों ने हंगामा कर दिया। कर्मचारियों के बवाल को देखते हुए विजिलेंस टीम को पुलिस बल का सहारा लेना पड़ा। यह कार्रवाई उपायुक्त के निर्देश पर की गई।
गांव दादू के हरदीप सिंह ने डिक्री के एवज में रिश्वत मांगने पर उपायुक्त से शिकायत की थी। इस कार्रवाई से क्षुब्ध कर्मचारियों ने विजिलेंस टीम पर जबरदस्ती करने के आरोप लगाए। इस बात को लेकर कर्मचारियों ने डीआरओ कार्यालय के समक्ष नारेबाजी भी की। कर्मचारियों के कड़े तेवर को देखते हुए टीम को पुलिस बल का सहारा लेना पड़ा।
विजिलेंस इंस्पेक्टर जगजीत सिंह ने बताया कि गांव दादू निवासी हरदीप सिंह किसी डिक्री को तुड़वाने के लिए डीआरओ कार्यालय आए थे। जब उन्होंने डीआरओ के रीडर से बात की तो उसने 4000 रुपये देने पर काम करने की बात कही।
इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत उपायुक्त अंशज सिंह से कर दी। उपायुक्त ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विजिलेंस टीम का गठन किया व कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इस पर तहसीलदार ओपी बिश्नोई के नेतृत्व में गठित टीम ने आरोपी श्रवण कुमार को रिश्वत लेते रंगे हाथ काबू कर लिया। उसे बृहस्पतिवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
आरोपी श्रवण कुमार को काबू करने के बाद टीम ने डीआरओ कार्यालय के एक बंद कमरे में लगभग डेढ़ घंटे तक कार्रवाई की। कार्रवाई के समय डीआरओ, तहसीलदार व दोनों शिकायतकर्ता मौजूद थे। बंद कमरे में की गई कार्रवाई के दौरान किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं थी।
बाहर कर्मचारियों के हंगामे को देखते हुए भारी पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। लगभग पांच बजे पुलिस सुरक्षा में आरोपी श्रवण कुमार को लघु सचिवालय से बाहर विजिलेंस टीम गाड़ी में बैठाकर अपने साथ ले गई।
उसी कार्यालय में कार्य करने वाले जगदीश कुमार ने कहां कि वह मौके पर मौजूद था। विजिलेंस इंस्पेक्टर जगजीत सिंह ने जबरदस्ती की है।
पूरा कार्य तहसीलदार और ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने हुआ है, पर उन्होंने किसी को कुछ नहीं कहा। टीम इंस्पेक्टर ने श्रवण कुमार के हाथों में धक्के से पैसे देकर, हाथ धोने को कहा।
इसके बाद उसे घसीटकर कमरे में ले गए। उन्होंने कहा कि अगर टीम सच्ची थी तो बंद कमरे में डेढ़ घंटे क्या किया गया। उन्होंने कहा कि पकड़ा गया कर्मचारी बेहद ईमानदार है, वो रिश्वत नहीं ले सक ता। अगर वह सच में दोषी में है तो वे नौकरी छोड़ देंगे।
एकदम हुई कार्रवाई से नाराज कर्मचारियों ने डीआरओ कार्यालय के बाहर कर्मचारी एकता व प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए। काफी समय तक कर्मचारी शोर मचाते रहे, कर्मचारियों का कहना था कि यह बहुत घिनौनी हरकत है। ऐसे में तो किसी भी कर्मचारी को आरोपी बनाया जा सकता है।
कर्मचारी इस कार्रवाई के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे। कर्मचारियों के गुस्से को देखते हुए भारी पुलिस बल बुलाया गया। सभी कर्मचारियाें को पुलिस के मदद से चल रही कार्रवाई वाले कमरे से दूर धकेला गया।
कमरे के चाराें पुलिस ने घेरा बना लिया, आरोपी को सचिवालय से बाहर लाते समय भी पुलिस बल के सुरक्षा चक्र का प्रयोग किया गया। कमरा खोलते समय कुछ कर्मचारी अंदर घुस गए और उसे न लेकर जाने का शोर मचाने लगे। ऐसे में पुलिस ने उन कर्मचारियों को कमरे से बाहर निकाला और आरोपी को साथ ले गए।
कर्मचारियों का कहना है कि इसके खिलाफ बृहस्पतिवार सुबह फैसला करेंगे। उनकी कोशिश होगी कि लघु सचिवालय की कार्रवाई ठप कर धरना दिया जाए।