डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही शाह सतनामजी महाराज का महारहमोकर्म दिवस रविवार को डेरा सच्चा सौदा के शाह सतनामजी धाम में श्रद्धा व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस मौके पर डेरा प्रमुख संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां ने साध संगत को नामदीक्षा दी और नशे व अन्य सामाजिक बुराइयां छोड़ने का संकल्प करवाया।
इस अवसर पर डेरा प्रमुख संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां ने हजारों जीवों को नाम की अनमोल दात प्रदान की गई और उन्हें नशे व अन्य सामाजिक बुराइयां छोड़ने का संकल्प करवाया। सत्संग के दौरान ‘कुल का क्राऊन’ व ‘जीवन आशा’ मुहिम के तहत एक-एक शादी करवाई गई।
जिन्हें डेरा प्रमुख ने अपनी नेक कमाई में से 25-25 हजार रुपये के चेक कन्यादान के रूप में प्रदान किए। वहीं 28 जरुरतमंद परिवारों महिलाओं को पौष्टिक आहार बांटा। इसके साथ ही ‘स्माईल ऑन इंनोसेंट फेस’ के तहत 28-28 बच्चों को मुफ्त किताबें और खिलौने दिए गए। डेरा प्रमुख ने अशियाना मुहिम के तहत साध-संगत द्वारा बनाकर दिए गए चार मकानों की चाबियां भी पात्र परिवारों को भेंट की। प्रेमी जगदीश इंसां को उसकी बेटी के इलाज के लिए एक लाख रुपये का चेक दिया। एक दिव्यांग को ट्राई साइकिल दी गई।
जुल्म करना और जुल्म सहना दोनों गलत
इस मौके पर डेेरा प्रमुख ने कहा कि समाज से बुराइयां हटानी हैं, अच्छाइयों को बढ़ावा देना है, समाज अच्छे नेक-भलाई के रास्ते पर चलें इसके लिए जगाने की जरुरत है। जो लोग बुरे कर्म करते हैं, निर्दोषों का कत्ल करते हैं, उनकी कूलें तक डूब जाया करती हैं। उन्हें नरक भोगना पड़ता है। जो मालिक की गोद में बैठ जाते हैं, मालिक उन्हें सचखंड सतलोक ले जाते है। उन्होंने कहा कि जुल्म करना गलत है और जुल्म सहना भी गलत है।
भीम अवार्डी बेटियों को कोच को दिया श्रेय
हरियाणा सरकार से भीम आवार्ड प्राप्त करने वाली शाह सतनाम जी गर्ल्स शिक्षण संस्थान की रोलर स्केटिंग खिलाड़ी प्रवीण इंसां, हरप्रीत कौर इंसां, हैंडबाल खिलाड़ी गुरमेल कौर इंसां ने इसका पूरा श्रेय अपने कोच डेरा प्रमुख संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह इंसां को दिया। डेरा प्रमुख ने कहा कि उनकी बेटियों को भीम आवार्ड मिला है तो उनके लिए यह बहुत बड़ी खुशी का दिन है।
हमें अपनी बेटियों पर गर्व है। उन्होंने आमजन से आह्वान करते हुए कहा कि बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं समझना चाहिए। बेटों की तरह बेटियों को पढ़ाया जाए, उन्हें खेलों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए। बेटियों को अबला नहीं सबला बनाया जाए, ताकि वह अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।