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Sirsa News: डेरा अनुयायियों ने विधवा महिला को मात्र 7 घंटे में बनाकर दे दिया पक्का मकान

Sat, 04 Jan 2025 11:19 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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संवाद न्यूज एजेंसी
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बडागुढ़ा। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों ने गांव बडागुढ़ा में एक विधवा महिला को मात्र 7 घंटों में पक्का मकान बनाकर दिया है। यह महिला अपने 3 बच्चों के साथ करीब 5 वर्षों से टपकती एवं जर्जर छत के नीचे रहने को विवश थी।

गांव बडागुढ़ा निवासी संदीप कौर के पति जसवंत सिंह की आठ वर्ष पूर्व मौत हो गई थी। वह लोगों के घरों में कार्य करके तीन बच्चों को पाल रही है। संदीप कौर के पास जर्जर हो चुके दो कमरों का घर था। स्थिति ये थी कि छत से मलबा गिर रहा था और दीवारों में दरारें आ चुकी थीं। बारिश में संदीप कौर अपने बच्चों को पड़ोसियों के घर सुलाती थी। संदीप कौर की एक बेटी मंदबुद्धि है। एक महीने पर नामचर्चा के दौरान संदीप कौर की स्थिति का पता डेरा अनुयायियों को लगा। इसके बाद उन्होंने मदद के लिए हाथ बढ़ा दिए। शनिवार को डेरा के रोड़ी ब्लॉक से बड़ी संख्या में डेरा अनुयायी साजो सामान लेकर संदीप कौर के कच्चे कोठड़े की नुहार बदलने पहुंच गए। जिस जगह जर्जर कोठड़ा था, वहां अब पक्का मकान बनकर तैयार हो गया। डेरा अनुयायियों ने चाय-पानी व लंगर का प्रबंध भी अपने स्तर पर कर रखा था।
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5 वर्ष की समस्या का मात्र कुछ घंटों में हुआ समाधान

इस सेवा कार्य में 140 सेवादारों व 12 राजमिस्त्रियों ने योगदान दिया। विधवा संदीप कौर की 5 वर्ष की समस्या का डेरा अनुयायियों ने मात्र 7 घंटों में ही समाधान कर दिया। संदीप कौर व उसके बच्चों को नया एवं पक्का आशियाना मिल गया।

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बॉक्स

मुझे हर यही चिंता रहती थी कि कहीं मकान न गिर जाए। बारिश में तो बच्चों को लेकर पड़ोस में सोना पड़ता था। डेरा सच्चा सौदा के अनुयायी मेरे लिए फरिश्ते बनकर आए। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरा भी कभी एक पक्का मकान होगा। आज के समय में किसी के लिए इतना कौन करता है। मैं सभी का इस मदद के लिए आभार व्यक्त करती हूं। - संदीप कौर
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ब्लॉक की साध-संगत ने विचार विमर्श कर विधवा संदीप कौर को आशियाना बनाकर देने का निर्णय लिया था। ब्लॉक की साध-संगत ने मिलकर मात्र 7 घंटों में ही मकान खड़ा कर दिया। हमारे गुरु जी ने हमें यही शिक्षा दी है कि इंसानियत की सेवा से बढ़कर कोई सेवा नहीं है। संगत जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हर समय तत्पर है। - पवन मेहता, ब्लॉक प्रेमी सेवक (रोड़ी)।
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