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टिड्डी मिलने की सूचना पर चंडीगढ़ व हिसार से आई कृषि अधिकारी,

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किसान के खेत में पाई गई टिड्डी। - फोटो : Sirsa
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उपमंडल के गांव चट्ठा में विगत दो दिनों पूर्व टिड्डी दल के पहुंचने की शिकायत पर चंडीगढ़ से कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक आरपी सिहाग सोमवार को सिरसा पहुंचे। संयुक्त निदेशक ने डीडीए बाबू लाल व केंद्रीय कपास अनुसंधान के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों ने टिड्डी के प्रकोप को लेकर रणनीति बनाई। जिसके तहत गांवों में खंड विकास अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई। फैसला किया गया कि सीमावर्ती गांवों में जिन किसानों के पास ट्रैक्टर वाले स्प्रे पंप है, उनकी सूची बनाई जाए। हर गांव में दस किसानों की टीम बनाई जाए और यदि कहीं पर टिड्डी पाई जाती है तो स्प्रे करके उसे खत्म किया जाए। इसके अतिरिक्त किसानों को भी कीटनाशक उपलब्ध करवाने पर चर्चा की गई। वहीं हिसार से कृषि वैज्ञानिकों की एक चार सदस्यीय टीम ने क्षेत्र के गांवों का दौरा किया। टीम ने यह देखा कि ये टिड्डी वास्तव में राजस्थान के सूरतगढ़ में पाई जाने वाली टिड्डी हैं या कोई और। ऐसे में ये टिड्डी वहीं निकली। एसडीओ सहित अन्य अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया था, लेकिन उन्हें चौटाला और भारूखेड़ा में टिड्डी नहीं मिला। सोमवार को चट्ठा गांव के बलकार सिंह व गुरसेवक सिंह ने बताया कि उनके गांव में टिड्डी दल आया हुआ है और उनके अंडे दिखाई दिए हैं। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की ओर से आज कोई अधिकारी नहीं आया और न ही कोई कीटनाशक उपलब्ध करवाया गया है। उन्होंने बताया कि कृषि विभाग की ओर से इससे बचने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। बतां दे कि कुछ दिनों पहले पंजाब व राजस्थान के सीमावर्ती गांवों में राजस्थान से टिड्डियां चौटाला, भारूखेडा, चट्ठा गांवों में पहुंच गई। जिस पर किसान परेशान हो गए। कुछ किसानों ने अपने स्तर पर कीटनाशक का प्रयोग भी किया। उधर, कृषि विभाग के एसडीओ अजय कुमार यादव ने बताया कि कालांवाली के असीर व एक अन्य गांव में पहले की तरह कहीं-कहीं एक से दो टिड्डीयां ही दिखाई दी हैं। जिससे किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। इससे फसलों को कोई नुक्सान नहीं होगा। उन्होंने बताया कि विभाग इसको लेकर सतर्क है। हिसार से कृषि वैज्ञानिक सदस्यीय टीम डॉ. योगेश कुमार के नेतृत्व में पहुंची थी। उन्होंने भी मौका मुआयना किया है, घबराने जैसी कोई बात नहीं है।
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नमी वाला मौसम रहता है अनुकूल
टिड्डी के लिए नमी वाला मौसम अनुकूल रहता है। यह रेतीली जमीन में बच्चे पैदा करती हैं। ऐसे में सिरसा के डबवाली, चोपटा, ऐलनाबाद,कालांवाली क्षेत्रों में रेतीली भूमि पर इसका असर हो सकता है। लेकिन पक्की मिट्टी व धान उत्पादक क्षेत्र में इसका प्रकोप नहीं दिखाई देखा। बरसात व नमी वाला मौसम इसके अनुकूल है।
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