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Sirsa News: बिगड़ते लिंगानुपात पर विभाग चिंतित, मांगा सहयोग

Fri, 15 May 2026 11:21 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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ओढ़ां में आरएमपी व मेडिकल संचालकों के साथ बैठक करते एसएमओ।
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ओढ़ां। बिगड़ते लिंगानुपात को सुधारने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने आरएमपियों व मेडिकल संचालकों से सहयोग मांगा है। गांव ओढ़ां के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को एसएमओ डॉ. सुमित जैन ने सीएचसी व पीएचसी के अधीनस्थ आने वाले सभी गांवों के आरएमपी (मेडिकल प्रैक्टिशनर) व मेडिकल संचालकों की बैठक बुलाई।
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पूरे सिरसा जिला के लिंगानुपात के आंकड़े की बात की जाए तो जनवरी से अप्रैल माह तक 1 हजार लड़कों पीछे 883 लड़कियां हैं। विभागीय रिपोर्ट के मुताबिक 4 माह के अंतराल में जिला में कुल 5548 बच्चों का जन्म हुआ जिनमें से 2947 लड़के व 2601 लड़कियां शामिल हैं। जो चिंताजनक है।

बैठक में बिगड़े लिंगानुपात को सुधारने के लिए जहां सभी से सहयोग मांगा गया तो वहीं महिलाओं को गर्भाश्य व स्तन कैंसर से बचाने के लिए शुरू की गई एचपीवी वैक्सीन लगवाने के लिए भी जागरूक करने की अपील की गई। बैठक में डॉ. सुमित जैन ने उपस्थितजनों से कहा कि कोई भी मुहिम हो वो बिना आमजन के सहयोग से पूरी तरह से सफल नहीं हो सकती।उन्होंने आरएमपियों से कहा कि उनका लोगों के घरों में दिन-रात आना-जाना होता है। वे इस अभियान में विभाग का बेहतर सहयोग कर सकते हैं।
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वहीं उन्होंने मेडिकल संचालकों से आह्वान करते हुए कहा कि वे जीवन रक्षक दवाइयों की आड़ में ऐसा कोई भी अनुचित कार्य न करें जिससे लिंगानुपात पर विपरीत असर पड़े। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी मेडिकल संचालक या आरएमपी इस तरह की गतिविधि में संलिप्त पाया गया तो उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की टीमें हर तरफ निगाह रखे हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा, आंगनबाड़ी व सहेली टीमें हर एक गर्भवती महिला का रिकॉर्ड रखे हुए हैं।

डॉ. जैन ने मेडिकल संचालकों व प्रैक्टिशनरों से अपील करते हुए कहा कि वे लोगों को कन्या भ्रूण हत्या व युवतियों को कैंसर से बचाने के लिए लगाई जाने वाली वैक्सीन के बारे में फैली भ्रांति को दूर करते हुए विभाग का सहयोग करें। ये वैक्सीन 14 वर्ष की उम्र होने पर युवतियों को सभी सरकारी अस्पतालों में नि:शुल्क लगाई जा रही है, ताकि भविष्य में उनमें गर्भाश्य व स्तन कैंसर जैसी बीमारी न हो। ये वैक्सीन 28 फरवरी से शुरू हो चुकी है। ये वैक्सीन कई तरह के वेरिएंट से लड़ता है। बैठक में उपस्थितजनों ने एसएमओ को भरोसा दिया कि वे विभाग का पूर्ण तरीके से सहयोग करेंगे। संवाद

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जलालआना, ओढ़ां व पन्नीवाला मोटा की स्थिति बेहद चिंताजनक

जनवरी 2026 से अप्रैल तक के आंकड़ों पर गौर की जाए तो ओढ़ां सीएचसी के अधीनस्थ आने वाले गांवों में चिंताजनक स्थिति गांव जलालआना, ओढ़ां व पन्नीवाला मोटा की है। जहां गांव जलालआना में 1 हजार लडक़ों के पीछे मात्र 222 लड़कियां हैं तो वहीं गांव ओढ़ां में 1 हजार लड़कों के पीछे मात्र 412 लड़कियां हैं। इसी प्रकार गांव पन्नीवाला मोटा में 1 हजार लड़कों के पीछे मात्र 455 लड़कियां हैं। क्षेत्र के इन 3 गांवों के आंकड़ों ने विभाग को चौंका रखा है। इन दोनों गांवों पर विभाग ने नजर बना रखी है। विभाग को संदेह है कि कहीं न कहीं कोई न कोई गड़बड़ तो है। ओढ़ां सीएचसी के अधीनस्थ पन्नीवाला मोटा व देसूजोधा सहित 2 पीएचसी पड़ती है।


नुहियांवाली, पन्नीवाला मोरिकां व किंगरे अच्छे पायदान पर

वर्ष 2025 में गांव नुहियांवाली लिंगानुपात में काफी पिछड़ा हुआ था। जिसके बाद गांव के युवाओं, आरएमपी, निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर अभियान चलाते हुए लोगों को जागरूक किया। परिणामस्वरूप वर्ष 2026 में गांव नुहियांवाली अच्छे पायदान पर पहुंचा है। इस समय गांव का लिंगानुपात का आंकड़ा 1 हजार लड़कों के पीछे 2500 लड़कियां हैं जोकि बेहद सराहनीय है। पिछले 4 माह के अंतराल में गांव नुहियांवाली में 14 प्रसव हुए। जिनमें 4 लडक़े और 10 लड़कियां शामिल हैं। इसी प्रकार गांव पन्नीवाला मोरिका का आंकड़ा भी काफी सराहनीय है जहां भी 1 हजार के पीछे 2500 लड़कियां हैं। तो वहीं गांव किंगरे में 1 हजार लड़कों के पीछे 3 हजार लड़कियां हैं। पूरे सीएचसी स्तर पर पिछले 4 माह में कुल 302 प्रसव हुए जिनमें 156 लडक़े व 146 लड़कियां शामिल हैं। सीएचसी का कुल आंकड़ा 1 हजार लडक़ों के पीछे 936 लड़कियां हैं।
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