हरियाणा पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल कर्मचारियों ने लंबित मांगों को लेकर शहर में प्रदर्शन किया और अंबेडकर चौक के पास जाम लगाने की कोशिश की। ट्रैफिक पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए स्थिति को संभाला और जाम नहीं लगने दिया। इसके बाद कर्मचारियों ने अंबेडकर चौक पर सीएम का पुतला फूंक कर नारेबाजी की।
बुधवार को कच्चे कर्मचारियाें को पक्का करने व केंद्र की तर्ज पर वेतनमान एवं भत्ते देने सहित अन्य ज्वलंत मांगाें को लेकर हरियाणा गवर्नमेंट पीडब्ल्यूडी मेकेनिकल वर्कर्स यूनियन के फील्ड कर्मचारियाें ने जिलास्तरीय रोष प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी कर्मचारियाें ने सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियाें के खिलाफ आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की और बीएंडआर कार्यालय के प्रांगण से नारेबाजी व प्रदर्शन करते हुए शहर भर में जुलूस निकाला।
इसके बाद प्रदर्शनकारी कर्मचारी अंबेडकर चौक पहुंचे, जहां उन्हाेंने मुख्यमंत्री का पुतला फूंककर अपना रोष जाहिर किया। इससे पूर्व सिंचाई विभाग, जन स्वास्थ्य विभाग, लोक निर्माण विभाग के सैकड़ाें कर्मचारियाें ने जिला प्रधान एवं राज्य महासचिव के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग के कार्यालय में एक जनसभा की।
यूनियन के राज्य प्रधान शिव कुमार पाराशर ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने जब से सत्ता संभाली है, तब से लेकर आज तक कर्मचारियाें के साथ भेदभाव किया जा रहा है। सरकारी कर्मचारी अपनी जायज मांगाें को लेकर जब भी आंदोलन करते हैं तो सरकार लाठी व गोली चलाकर उनकी आवाज को दबाने का प्रयास करती है। सरकार कर्मचारियाें की मांगाें की अनदेखी कर उनका शोषण कर रही है, जिसके चलते कर्मचारी वर्ग में सरकार के प्रति भारी नाराजगी व गुस्सा व्याप्त है। उन्हाेंने कहा कि इस संबंध में आगामी 22 जून को भिवानी में केंद्रीय कमेटी व जिला कमेटी के पदाधिकारियाें की संयुक्त बैठक में सरकार के खिलाफ आरपार के आंदोलन की घोषणा की जाएगी, जिसमें मुख्यमंत्री आवास घेराव एवं जेल भरो आंदोलन पर विचार किया जाएगा।
यूनियन के प्रदेश प्रेस सचिव गुरदीप सिंह सैनी व उपाध्यक्ष निर्मल सिंह ने कहा कि पांच साल की सेवा के बाद कंफर्म करना, ठेका प्रथा व निजीकरण पर रोक लगाना, दिहाड़ीदार को पक्का करना, तकनीकी पदाें पर कार्यरत कर्मचारियाें को 1 मई 1990 से 1200-2040 का वेतनमान देना, 10 दिसंबर 2013 को पारित अध्यादेश वापस लेना, चौथा दर्जा कर्मचारियाें को पहली एसीपी 2550 की बजाय 3050 देना, सेवा के दौरान मृत्यु होने पर अनुदान राशि पांच लाख रुपये देना, मेडिकल कैश लैस सुविधा लागू करना, खाली पदाें को नियमित भर्ती करके भरना आदि मांगाें को लागू किया जाए।