सिरसा। आयुष्मान योजना के बड़े-बड़े दावों के बावजूद सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों, पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की कमी बनी हुई है। यह आरोप सिरसा की सांसद, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य कुमारी सैलजा ने हरियाणा की भाजपा सरकार पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर निशाना साधते लगाया।
सैलजा ने आयुष्मान योजना का बकाया तत्काल जारी करने, सरकारी अस्पतालों में रिक्त पद भरने, अस्थायी व्यवस्था पर निर्भरता घटाने और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में स्वीकृत 27,269 पदों के मुकाबले 20,403 स्थायी कर्मचारी हैं, जबकि विभिन्न श्रेणियों में 47 हजार से अधिक अस्थायी कर्मचारी कार्यरत हैं।
सैलजा ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन में करीब 14,468, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग में 7,398 तथा आयुष विभाग में 2,234 कर्मचारी अनुबंध या अन्य अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि पर्याप्त स्थायी स्टाफ के अभाव में सरकार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का दावा किस आधार पर कर रही है।
गरीब मरीज इलाज के लिए कहां जाएं...
कुमारी सैलजा ने कहा कि चिकित्सक संगठनों के अनुसार आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों का करीब 1,200 करोड़ रुपये भुगतान लंबित है। भुगतान विवाद के चलते 1 सितंबर को निजी अस्पतालों की सांकेतिक हड़ताल का असर आयुष्मान कार्डधारकों पर पड़ा और कई जगह नए मरीजों के भर्ती होने तथा निर्धारित ऑपरेशन में परेशानी हुई। उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों ने भुगतान न होने पर 15 सितंबर के बाद अनिश्चितकालीन सेवाएं रोकने की चेतावनी दी है। ऐसे में गरीब मरीज इलाज के लिए कहां जाएं।
घटते लिंगानुपात पर जताई चिंता :
सैलजा ने कहा कि वर्ष 2025 में जन्म के समय लिंगानुपात 923 था, जो जून 2026 तक घटकर 900 रह गया। चरखी दादरी में यह आंकड़ा 829 तक पहुंचना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग में अध्यक्ष की नियुक्ति के बावजूद छह सदस्य पद दिसंबर 2025 से रिक्त हैं। उन्होंने घटते लिंगानुपात को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता जताई।