बढ़े विद्युत बिलों को लेकर लोगों का गुस्सा दिनों दिन बढ़ता जा रहा है। शनिवार को जहां गांव जोधपुरिया और बेहरवाला खुर्द में ग्रामीणों ने बिजली बिलों की होली जलाते हुए बिल न भरने का फैसला लिया था, वहीं रविवार को बड़ागुढ़ा क्षेत्र के गांव कर्मगढ़ में ग्रामीणों ने बिजली बिल न भरने का ऐलान किया।
गांव के चौक में आयोजित बैठक में ग्रामीणों को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय किसान सभा के नेता ओपी सुथार ने कहा कि जब से प्रदेश व देश में भाजपा सरकार बनी है, तभी से लोगों को पछताना पड़ रहा है।
भाजपा सरकार के राज में बिजली की दरों में अनाप-शनाप वृद्धि कर लोगों की कमर तोड़ने का काम किया गया है, जिसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि शहरी तो दूर ग्रामीण उपभोक्ताओं के भी 20 से 30 हजार रुपये बिल आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि घरेलू उपभोक्ता इतने भारी भरकम बिल भरने में असमर्थ हैं।
इस पंचायत में सभी ने एक स्वर में निर्णय लिया कि वे बिलों को नहीं भरेंगे। कोई भी गांव में बिल भरवाने के लिए आएगा तो उसका विरोध किया जाएगा। ग्रामीणों ने निर्णय लिया की जब तक पुराना सिस्टम बहाल नहीं किया जाता, बिल नहीं भरेंगे।
मेहनाखेड़ा के ग्रामीणों ने बिजली के बिल जलाए
ऐलनाबाद। गांव मेहनाखेड़ा के ग्रामीणों ने बढ़े बिजली बिलों के विरोध में प्रदर्शन करते हुए बिलों की होली जर्लाई।
जानकारी अनुसार गांव के नंबरदार लालचंद के नेतृत्व में ग्रामीणों ने गांव के पंचायत घर में एकत्रित होकर सरकार द्वारा भेजे गए बिजली बिल को लेकर रोष प्रदर्शन किया और बिजली बिलों की होली फूंकते हुए बिल की अदायगी न करने का निर्णय लिया।
ग्रामीणों ओमप्रकाश फौजी, रामजीलाल, मनजीत सिंह, विक्की गरुवा, दलबीर गरुवा, सत्यवान, लीलूराम, भागीरथ, केसराराम, टीकू राम, मघाराम आदि ने कहा कि सरकार ने बिजली बिलों में बेतहाशा वृद्धि कर दी है। जिसे बिजली उपभोक्ता भरने में पूरी तरह असमर्थ है।
उन्होंने कहा कि फसल खराब होने से वर्तमान समय में किसानों की यह हालात बनी हुई है कि वे अपनी कृषि भूमि गिरवी रखकर भी कर्जे से मुक्ति नहीं पा सकते।
सरकार को चाहिए कि ऐसी हालात में ग्रामीणों को राहत प्रदान करनी चाहिए, जबकि सरकार ने और मार मारते हुए बिजली बिलों में भारी वृद्धि कर दी है।
इसलिए सरकार को उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए बिजली की पुरानी दर को लागू कर राहत प्रदान करनी चाहिए।