बरनाला में पकड़ी गई अल्ट्रासाऊंड मशीन की हार्ड डिस्क तथा मशीन पर पड़ी जैली की बोतल राज खोलने के लिए काफी हैं। पंजाब स्वास्थ्य विभाग की टीम तकनीकी आधार पर भी जांच करने में जुट गई है।
पंजाब स्वास्थ्य विभाग के अनुसार बरनाला में पकड़ी गई दोनों अल्ट्रासाऊंड मशीन करीब बारह से पंद्रह साल पुरानी हैं। इनका रजिस्ट्रेशन 2005 में हुआ था, 2010 में रद्द होने के बाद पूर्व सीएमओ ने इसे सील कर दिया था। सील को उखाड़कर मशीन का प्रयोग किया जा रहा था। मशीन के जरिए कितने अल्ट्रासाऊंड हुए हैं, यह रिकॉर्ड हार्ड डिस्क में होता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग तकनीकी विशेषज्ञ से हार्ड डिस्क से डाटा कलेक्ट करवाएगा। वहीं मशीन से जैली (अल्ट्रासाऊंड में प्रयोग होने वाली दवा) की आठ बोतल मिली हैं। विशेषज्ञ के अनुसार एक बोतल से कम से कम 10 से 15 अल्ट्रासाऊंड आसानी से हो जाते हैं। विभाग संदेह जता रहा है कि आरोपियों ने कम से कम 80 से 100 महिलाओं का अल्ट्रासाऊंड किया होगा। सीएमओ बरनाला केएस सैनी ने बताया कि प्रत्येक एंगल से मामले की जांच की जा रही है। किसी भी गुनहगार को बख्शा नहीं जाएगा। जिन महिलाओं ने लिंग जांच करवाई है, उनकी भी सूची बनाई जाएगी। जांच करके उनके खिलाफ भी केस दर्ज किया जाएगा।
हरियाणा की टीम को बधाई देता हूं, जिन्होंने हमारे एरिया में आकर पीएनडीटी का मामला ट्रेस करवाया। दलाल रामदास डबवाली का ही था। जोकि पीएनडीटी के ही एक मामले में जमानत पर आकर पुन: काम करने लगा था। इसलिए टीम को आसानी हुई। जांच में तकनीकी विशेषज्ञों की राय ली जाएगी।
-केएस सैनी, सीएमओ, बरनाला
पंजाब में खत्म हो रही हरियाणा की नन्हीं छांव
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने पड़ोसी राज्य में चल रहे लिंग जांच का भंडाफोड़ कर साबित कर दिया है कि प्रदेश नन्हीं छांव के मामले में महज ढिंढोरा पीट रहा है। पिछले डेढ़ साल का रिकॉर्ड देखें तो पंज दरिया की धरती कहे जाने वाले पंजाब में यह धंधा खूब फला-फूला है। छापामारी के बावजूद कोख में लिंग जांच का खेल बदस्तूर जारी है। रेट भी बढ़ गए हैं।
बता दें कि करीब डेढ़ साल पहले 31 दिसंबर 2014 को डबवाली के गांव मांगेआना में सीआईडी ने मोबाइल अल्ट्रासाऊंड केंद्र का भंडाफोड़ किया था। पोर्टेबल मशीन से मोगा का रहने वाला जितेंद्र कुमार लिंग जांच की रिपोर्ट देता था। प्रति लिंग जांच पर करीब दस हजार रुपये लिए जाते थे। इसके बाद 19 जुलाई 2015 को हरियाणा स्वास्थ्य विभाग ने गांव घुकांवाली के झोलाछाप जगदीश गोदारा को ट्रेस करते हुए मोगा में लुधियाना बवासीर अस्पताल चलाने वाले डॉ. सुनीत मित्तल को रंगे हाथों गिरफ्तार करता था।
यह डॉक्टर लिंग जांच की एवज में 12 से 15 हजार रुपये लेता था। इसके बाद टीम ने 22 जून 2016 को टीम ने सीएम परकाश सिंह बादल के गृह जिले श्री मुक्तसर साहिब में छापामारी करके पूर्व एसएमओ मीना जग्गा को लिंग जांच करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। पूर्व एसएमओ कोटकपूरा रोड स्थित जनता अस्पताल चलाती थी। उसने भी लिंग जांच का दाम फिक्स कर रखा था। वह प्रति ग्राहक 25 हजार रुपये वसूल करती थी। करीब पंद्रह दिन बाद सात जुलाई को टीम ने डबवाली के झोलाछाप डॉक्टर रामदास को ट्रेस करते हुए बरनाला में छापा मारा। भगत सिंह चौक स्थित गुरु तेग बहादुर चैरिटेबल अस्पताल में लिंग जांच का पर्दाफाश किया। यहां लिंग जांच करने पर प्रति ग्राहक 30 हजार रुपये फिक्स थे। इसके बावजूद धंधे में संलिप्त लोग बेखौफ लिंग जांच कर रहे हैं। डेढ़ साल में ही लिंग जांच का रेट तीन गुना बढ़ गया है। इसके बावजूद बेटे की चाह में सीमावर्ती इलाके के लोग पंजाब पहुंच रहे हैं। उपरोक्त चारों मामलों में पंजाब स्वास्थ्य विभाग की जमकर किरकिरी हुई है। इससे यह भी साबित हो रहा है कि गया कि प्रदेश में 'नन्हीं छांव प्रोजेक्ट को अधिकारी कितनी तवज्जो दे रहे हैं।
हरियाणा पुलिस कटघरे में
हरियाणा पुलिस की जांच पर भी सवाल उठा है। चूंकि जगदीश गोदारा को पहली दफा गिरफ्तार करने के बावजूद पुलिस उससे मोगा में हो रहे लिंग जांच का राज नहीं उगलवा पाई थी। जमानत पर आते ही गोदारा ने पुन: धंधा शुरू कर लिया। यहीं नहीं पकड़े गए मोगा निवासी जितेंद्र कुमार ने रिमांड में एक सोनोग्राफी मशीन होने का कहा था, पुलिस उसे भी नहीं ढूंढ पाई। आखिरकार एसपी सिरसा ने जांच अधिकारी को सस्पेंड कर दिया था। दूसरे मामले में भी ऐसा ही हुआ। सुनीत मित्तल ने डबवाली के कई लोगों का नाम उगला। एक कांग्रेस नेता भी उसमें शामिल था। पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने श्री मुक्तसर साहिब तथा बरनाला में पकड़े गए मामले वहीं की पुलिस के हवाले कर दिए।
मोगा, मोगा, मोगा
डेढ़ साल में सीआईडी डबवाली के सहयोग से विभाग द्वारा पकड़े गए चार मामलों में तीन में मुख्य आरोपी मोगा के रहने वाले हैं। ऐसे में प्रतीत होता है कि पंजाब मोगा लिंग जांच का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
झोलाछाप से फैला जाल
अब तक जितने भी मामले सामने आए हैं, उनमें यही है कि झोलाछाप सबसे अधिक भूमिका निभा रहे हैं। गांव घुकांवाली निवासी जगदीश गोदारा की तरह रामदास का नाम भी 2014 में सामने आया था। पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इस मामले में जिला सिरसा के करीब 100 झोलाछाप चिकित्सकों के नाम उजागर हुए थे। पुलिस की जांच बीच में ही लटक गई।
महंगी जांच, ढेरों सवाल
कोख में लिंग जांच बहुत महंगी हो चली है। ऐसे में महंगी जांच, ढ़ेरों सवाल खड़े कर रही है। चूंकि 25 से 30 हजार रुपये की रकम का इंतजार समाज के नीचले दर्जे के लोग नहीं कर सकते। ऐसे में मध्यवर्गीय तथा उच्च वर्गीय परिवार संदेह के घेरे में हैं। जो पुत्र मोह में जांच करवाते हैं? यह वर्ग समाज का सबसे शिक्षित वर्ग माना जाता है।
लिंग जांच मामलों पर हेल्थ मिनिस्टर अनिल विज पूरी तरह निगरानी रखते हैं। टीम यहां भी दबिश देती है या कोई कार्रवाई करती है तो एक घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब करते हैं। प्रत्येक मामला उनके संज्ञान में होता है। कोख में लिंग जांच बेशक कहीं भी हो रही हो, हम उसे पकड़ने के लिए तैयार हैं।
-सूरजभान कंबोज, सीएमओ, सिरसा