दिल्ली सहित कई शहरों में बेरोजगारों को रेलवे में टीसी और विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर की नौकरी दिलवाने के नाम पर लाखों की ठगी करने वाला रोहतक का नरेश राठी आखिरकार सिरसा पुलिस के हत्थे चढ़ गया। पुलिस के अनुसार दिल्ली में रेलवे के कुछ अधिकारियों के साथ मिलकर उसने ठगी की थी। इस मामले केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को भी उसकी तलाश है। पकड़े गए राठी ने खुलासा किया कि वह पिछले एक साल से सीबीआई और हरियाणा पुलिस को चकमा देकर उत्तराखंड की वादियों में आराम फरमा रहा था। ठगी के रुपयों से उसने देहरादून में पीजी खोल रखा है। हालांकि वह वहां जाता बहुत कम है।
सोमवार को सिरसा पुलिस को गुप्त सूचना मिली की रोहतक के बसाना निवासी नरेश राठी सिवानी कोर्ट कैंपस में आया हुआ है। शहर थाने में तैनात एसआई इंद्रसेन अपनी टीम लेकर सिवानी पहुंचे और कोर्ट कैंपस के चारों तरफ घेरा डाल लिया। जैसे ही नरेश राठी दिखा सिरसा पुलिस ने उसे दबोच लिया। हालांकि इस दौरान उसने भागने की भी कोशिश की थी, लेकिन वह कामयाब न हो पाया।
पुलिस के अनुसार सिरसा में उसके खिलाफ साल 2015 में तीन बेरोजगारों से नौकरी दिलवाने की एवज में साढे़ 22 लाख रुपये ठगने का पर्चा दर्ज हुआ था। इस केस में उसका दोस्त गांव माधोसिंघाना निवासी आशीष कुमार भी नामजद है। मंगलवार दोपहर आरोपी नरेश राठी को अदालत समक्ष पेश किया गया। मुख्य न्यायिक दंडाअधिकारी ने उसे दो दिन के पुलिस रिमांड में भेज दिया। जांच अधिकारी इंद्रसेन का कहना है रिमांड अवधि के दौरान नरेश राठी से अपने फरार साथी आशीष के बारे में पूछताछ करेगी। साथ ही हड़पे गए साढे़ 22 लाख की बरामदगी भी। ये दो मामले तो सिरसा पुलिस से जुड़े है और प्रदेश के किसी भी थाने में उसके खिलाफ केस दर्ज है तो वहां की पुलिस उसे प्रोडेक्शन वारंट पर सिरसा से ले जाएगी। नरेश राठी पर सीबीआई ने दिल्ली में भी केस दर्ज कर रखा है। पिछले साल युवाओं को रेलवे में नौकरी दिलवाने के नाम पर माटा माल वसूला गया। इस मामले में रेलवे के भी कई अधिकारी आरोपी है और नरेश राठी भी सीबीआई द्वारा दर्ज किए मामले में नामजद आरोपी है। पुलिस एक साल से वह उत्तराखंड में रह रहा था।
तीन बेरोजगारों से लिए 22 लाख
फतेहाबाद जिले के गांव दैयड़ निवासी वीर सिंह का सिरसा के माधोसिंघाना में रहने वाले आशीष के जरिए नरेश राठी से संपर्क हुआ। नरेश राठी ने उसके पुत्र संदीप व राजेश को रेलवे विभाग में सीटी लगाने का वादा किया। वीर सिंह की देखो देख दैयड़ निवासी पवन ने भी बात की तो नरेश ने उसे जेयूजे में प्रोफेसर लगाने का भरोसा दिया। तीनों को नौकरी दिलवाने की एवज में उसने साढे़ 22 लाख रुपये लिए। रुपयों का लेन-देन एक कंप्यूटर सेंटर में हुआ। रुपये लेकर नरेश व उसका साथी लापता हो गए। सिरसा पुलिस ने दोनों पर नौ जुलाई 2015 को केस दर्ज कर लिया।