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वैट घोटाला: दो कारोबारियों के आवास पर सीबीआई का छापा

Tue, 26 Apr 2016 11:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
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सीबीआई - फोटो : Bureau
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चंडीगढ़ से आई सीबीआई की दस सदस्यीय टीम ने मंगलवार तड़के दो कारोबारियों के आवास पर छापा मारकर दस्तावेज अपने कब्जे में लिए। इसकी जानकारी मिलते ही सिरसा सहित मंडी डबवाली, ऐलनाबाद व रानियां के व्यापारियों में भी हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि सीबीआई की रेड कारोबारियों द्वारा फर्जी फर्में बनाकर करीब दस हजार करोड़ के वैट घोटाले को अंजाम देने के संबंध में हुई है।
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जानकारी के अनुसार इंस्पेक्टर सुभाष कुमार के नेतृत्व में आई सीबीआई की सोमवार रात ही सिरसा पहुंच गई थी। मंगलवार सुबह शहर थाना पुलिस को साथ लेकर सीबीआई टीम पांच-पांच के समूह में बंट गई। इंस्पेक्टर सुभाष कुमार की अगुवाई वाली टीम ने भीम कॉलोनी निवासी कारोबारी राजेश सैनी के घर पर छापा मारा जबकि दूसरी टीम ने अमित गोयल के घर दबिश दी।

केंद्रीय जांच एजेंसी ने सुबह शाम तक दोनों कारोबारियों के घर को खंगाल दिया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज कब्जे में लिए। इस दौरान सीबीआई ने घर में मौजूद लोगों को बाहर नहीं जाने दिया। सुबह करीब 11 बजे सीबीआई छापे की भनक व्यापारियों को लगी तो उनमें खलबली मच गई। शहर के मुख्य बाजारों व मंडी में मोटी फर्मों के अधिकांश संचालक भूमिगत हो गए।
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एसआईटी की रिपोर्ट पर मामले सीबीआई को सौंपा
सिरसा में सीबीआई की छापेमारी को दस हजार करोड़ के वैट घोटाले से जोड़कर देखा जा रहा है। खास बात यह है कि सिरसा जिले में सैकड़ों फर्जी फर्मं होने का खुलासा कुछ समय पहले हुआ था। सिरसा के कारोबारियों ने इन फर्जी फर्मों के जरिये करोड़ों की टैक्स चोरी को अंजाम दिया। प्रदेश के लोकायुक्त ने तत्कालीन आईजी श्रीकांत जाधव के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। एसआईटी जांच के सिलसिले में सिरसा पहुंची लेकिन कराधान विभाग के सीनियर अधिकारियों ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया। इसके बाद एसआईटी प्रमुख ने लोकायुक्त को अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट के बाद सरकार ने मामले की जांच केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को सौंप दी।

सिगरेट खरीद में सिरसा नार्थ इंडिया टॉपर
नार्थ इंडिया में जितनी सिगरेट सालभर में बिकती है, उससे ज्यादा की खरीद सिरसा में होती है। सिगरेट के जरिए टैक्स चोरी के खेल को फर्जी फर्म संचालकों ने अंजाम दिया। सिरसा में कॉटन के कारोबारियों ने भी लाखों रुपये की सिगरेट खरीद दर्शा दी। सूत्रों के अनुसार सिरसा में सिगरेट के असल कारोबारियों द्वारा जितनी सिगरेट की खरीद नहीं की गई, उससे अधिक फर्जी व्यापारियों द्वारा दर्शा दी गई। दरअसल, सिगरेट पर 12 प्रतिशत टैक्स देना होता है। फर्जी फर्म संचालकों ने सिगरेट की खरीद दर्शाई और राजस्थान व अन्य प्रदेशों की फर्मों को उनकी बिक्री दर्शा दी। सेल टैक्स और सेंट्रल टैक्स में अंतर को इन व्यापारियों ने भुनाया।

सेल टैक्स अधिकारियों से मिलीभगत
 सेल टैक्स विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना कारोबारियों के लिए फर्जी फर्म बनाना नामुमकिन है। सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारियों ने मोटा माल कमाने के लिए नियमों से खिलवाड़ करके कारोबारियों को फर्जी फर्में बनाने की छूट दे दी। इस मिलीभगत से सिरसा में एक अनुमान अनुसार एक हजार से अधिक फर्जी फर्में बनी। टैक्स चोरी कर प्रत्येक वर्ष सैंकड़ों फर्में बंद कर दी जाती है।
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