सिरसा के एडवोकेट अनमोल की मौत आत्महत्या थी या फिर हत्या? करीब साढ़े नौ माह बाद भी पुलिस इस पर से पर्दा नहीं उठा सकी। परिजनों ने जांच को संदेह के घेरे में लेते हुए डीएसपी डबवाली से सवाल पूछे हैं। जांच अधिकारी सवालों के जवाब ढूंढने में लगे हुए हैं। मंगलवार को अनमोल के पिता एडवोकेट शिंगारा सिंह, मां नीलम रानी तथा बहन डॉ. पिंकी डबवाली में डीएसपी कार्यालय पर पहुंचे।
परिजनों ने बताया कि 11 अगस्त 2015 को वारदात के बाद उन्हें बताया गया कि अनमोल का खैरपुर कॉलोनी में झगड़ा हो गया है। वह मौके पर पहुंचे तो मामला कुछ और ही था। अनमोल का शव समीर ग्रोवर के घर में पड़ा था और बगल में सुसाइड नोट। पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पिता शिंगारा सिंह से सुसाइड के बयान पर हस्ताक्षर ले लिए, जबकि उस समय बेटे की मौत से वे सदमे में थे। पुलिस ने इत्तफाकिया मौत की कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवा दिया। परिजनों ने कहा कि जबकि हकीकत यह है कि अनमोल की हत्या की गई है।
हत्या में समीर संलिप्त है। बहन पिंकी के अनुसार पुलिस का कहना है कि उसके भाई ने खुद को गोली मारी है, जोकि दाईं तरफ से चली थी। जबकि फोरेंसिक लैब तथा पोस्टमार्टम की रिपोर्ट पुलिस के झूठ को बेनकाब कर रही हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चिकित्सक ने साफ लिखा है कि गोली बाई तरफ से चली थी। हकीकत यह है कि उसका भाई लेफ्ट हैंड नहीं था। यहां तक कि पिस्तौल या अन्य सामान पर उसके भाई के फिंगर प्रिंट तक पुलिस नहीं ले पाई।
बहन ने बताया पैसे को लेकर था विवाद
बहन पिंकी के अनुसार घटना वाले दिन अनमोल जिस गाड़ी पर समीर के घर गया था, उसमें से पुलिस को अफीम, एक देसी कट्टा तथा दो जिंदा कारतूस मिले थे। अगर उसके भाई को सुसाइड करना होता तो वह समीर की 32 बोर पिस्टल का प्रयोग न करता। बल्कि अपने देसी कट्टे ही खुद को शूट करता। पिंकी के अनुसार अनमोल तथा समीर के बीच पैसे के लेनदेन को लेकर विवाद चल रहा था। इसी विवाद में उसके भाई की हत्या की गई है। हत्या कैसे की गई है? इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं, यह एफआईआर दर्ज होने के साथ समीर की गिरफ्तारी से पता चल सकता है। लेकिन पुलिस मामले को दबा रही है।
स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर विश्वास न होने की वजह से उन्होंने मामला डबवाली ट्रांसफर करवाया था। लेकिन यहां भी उन्हें न्याय मिलने की आस नहीं है। चूंकि एक बार भी उनकी बात सुनने के लिए जांच अधिकारी डीएसपी सत्यपाल ने उन्हें बुलाया नहीं।
स्वतंत्र एजेंसी करे जांच
एडवोकेट अनमोल मामले में डीएसपी सत्यपाल जांच कर रहे हैं। जांच मृतक की मां नीलम की शिकायत पर शुरू हुई है। उनका कहना है कि हरियाणा पुलिस से उन्हें इंसाफ की उम्मीद नहीं है। जांच स्वतंत्र एजेंसी से होनी चाहिए।
समीर ने पुलिस को दिया यह बयान
पुलिस को दिए बयान में समीर का कहना है कि अनमोल उसका सीनियर था। वे इक्ट्ठे क्रिकेट खेला करते थे। वे आज तक एक-दूसरे के घर नहीं गए थे। घटना वाले दिन बिना कॉल किए अनमोल उसके घर आया था। उसका कहना था कि उसका असलहा का लाइसेंस लगभग तैयार है। वह हथियार खरीदना चाहता है। कौन सा ले। उसने उसकी पिस्टल देखने के लिए मांगी। मैंने उसे दे दी। उसके लिए ठंडा लेने के लिए रसोई में गया तो पीछे से उसने सुसाइड कर लिया।
जांच अधिकारी डीएसपी सत्यपाल से सीधी बात
सवाल: एडवोकेट अनमोल मामले की जांच कहां तक पहुंची है?
डीएसपी: मुझे करीब पंद्रह दिन पहले ही जांच सौंपी गई है। मैंने मौका का मुआयना करने के साथ-साथ समीर के बयान भी दर्ज किए हैं। अंतिम समय में अनमोल ने अपने मोबाइल से जिस-जिस से बात की थी, उनसे भी पूछताछ की गई है। अभी जांच चल रही है। परिजनों ने कुछ बिंदु बताए हैं।
सवाल: उन बिंदुओं पर क्या किया जा रहा है?
डीएसपी: परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली बाई ओर से चलनी बताई गई है। जबकि पुलिस कुछ कह रही है। संबंधित मेडिकल बोर्ड का ओपिनियन लिया जाएगा। यह भी सवाल किया है कि फिंगर प्रिंट नहीं आए। स्थानीय एक्सपर्ट ने रिपोर्ट दी है कि गिलास में ठंडा पेय होने के कारण पानी की परत गिलास पर जम गई थी। पिस्टल पर खून था। ऐसे में फिंगर प्रिंट डवलप नहीं हो पा रहे थे। तीसरी बात स्वैब न लेना बताते हैं। कई मामलों में ऐसा नहीं होता।
सवाल: आप पर आरोप लगा रहे हैं कि उनको बुलाया तक नहीं?
डीएसपी: दो बार दो-दो घंटे मेरे सामने बैठे रहे हैं। तीसरी दफा आज आ रहे हैं। अनमोल का पिता वकील है, जो पूरा समझदार है। वे बयान खुद नहीं लिखवा रहे। बार-बार मना कर रहे हैं। अब बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं।
सवाल: अब तक की जांच में क्या सबूत मिला है?
डीएसपी: देखिए, हत्या का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है। उपरोक्त सवालों के जवाब मिलने के बाद आगामी कार्रवाई होगी। जांच चल रही है।