पंचायत के साथ फ्राड करने वाले ग्राम सचिव को उपायुक्त ने निलंबित कर दिया है। हालांकि निलंबन प्रक्रिया के दौरान ही सचिव ने पैसे जमा करवा दिए थे। यहीं नहीं अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस जारी हुआ तो मेडिकल दे दिया। आठ माह से चले आ रहे इस मामले में 24 हजार 938 रुपये ब्याज बना है। क्लीन चिट पाने के लिए ग्राम सचिव को यह रकम भी अदा करनी होगी।
गांव तेजाखेड़ा की पंचायत हर साल बागवानी के लिए साढ़े छह एकड़ जमीन ठेके पर देती है। इस बार पंचायत के गठन से पहले प्रशासक ने 16 दिसंबर 2015 को जमीन की बोली करवाई। जमीन का ठेका तीन लाख बीस हजार रुपये में छूटा। पंचायत सचिव विजय कुमार ने उपरोक्त राशि में से केवल 35 हजार रुपये पंचायत एकाऊंट में जमा करवा दिए। शेष दो लाख 85 हजार रुपये गबन करके उसी दौरान छुट्टी पर चला गया। 10 जनवरी 2016 को चुनाव संपन्न होने के बाद फरवरी 2016 में नवगठित पंचायतों को चार्ज देते समय हिसाब-किताब हुआ। मामला सामने आया कि संबंधित ग्राम सचिव ने पैसा जमा नहीं करवाया। चरखीदादरी निवासी विजय कुमार उसी समय से अनुपस्थित चल रहा है। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी कार्यालय ने उपरोक्त राशि जमा करवाने तथा अनुपस्थित रहने का कारण पूछा। कई पत्र जारी करने के बाद भी जवाब नहीं मिला तो विभाग ने उपरोक्त ग्राम सचिव के खिलाफ सरकारी पैसे के गबन तथा धोखाधड़ी करने के आरोप में केस दर्ज करने की चेतावनी दे दी। चेतावनी के बाद जून 2016 में ग्राम सचिव ने अपना मेडिकल पेश कर दिया। इसके साथ ही गबन किए दो लाख 85 हजार रुपये की राशि भी जमा करवा दी। करीब एक माह बाद जिला उपायुक्त ने ग्राम सचिव विजय कुमार को निलंबित कर दिया है। साथ में जांच के आदेश जारी करने होंगे।