हरियाणा के सिरसा में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कुलदीप सिंह ने मंगलवार को जानलेवा हमला करने के मामले में दोषी प्रदीप कुमार को पांच साल कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुना दी। इस मामले में प्रदीप कुमार से पुलिस ने पिस्तौल बरामद किया था।
इसके साथ ही न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता मांगेराम निवासी मैना खेड़ा के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में धारा 193 आईपीसी के तहत केस चलाने का आदेश दिया। शिकायतकर्ता ने झूठे बयान देकर न्यायालय को गुमराह था। इस मामले में रानियां थाना पुलिस ने अप्रैल 2016 में केस दर्ज किया था।
मामले के अनुसार गांव मैना खेड़ा निवासी मांगेराम का जमीन को लेकर कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। पांच अप्रैल 2016 को वह अपनी जमीन गेहूं की फसल काट रहा था। इसी दौरान जिनसे विवाद चल रहा था वे लोग वहां पहुंच गए और उनमें से एक ने मांगेराम को गोली मार दी। पुलिस को दिए बयान में मांगे राम ने कई लोगों के नाम लिखवा दिए।
पुलिस जांच में जिन आरोपियों पर आरोप लगाया गया था, वह सही नहीं पाया गया। इसके बाद पुलिस ने शिकायतकर्ता मांगेराम के न्यायालय समक्ष कलमबद्ध बयान दर्ज करवाए। इसमें उसने प्रदीप कुमार, महंगा सिंह, शंकर लाल व दलबीर सिंह पर आरोप लगाया। मामले में गवाही के दौरान शिकायतकर्ता ने न्यायालय को गुमराह करने के लिए अलग-अलग बयान दिए।
मंगलवार को इस मामले का निपटारा करते हुए न्यायालय ने इस मामले में प्रदीप कुमार को दोषी करार देते हुए पांच साल कैद की सजा सुना दी और महंगा सिंह व शंकर लाल को बरी कर दिया। दलबीर की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी थी। इसके अलावा न्यायालय ने शिकायतकर्ता मांगेराम के खिलाफ सीजेएम कोर्ट में केस चलाने का आदेश दिया। प्रदीप कुमार निवासी ढाणी खारियां को इसलिए दोषी करार दिया क्योंकि पुलिस ने उसके कब्जे से ही पिस्तौल बरामद किया था।