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गांव रूपावास में खेत में बने ट्यूबवेल के कमरे पर गिरी आसमानी बिजली

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गांव रूपावास में खेत में बने ट्यूबवेल के कमरे पर गिरी बिजली
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चोपटा। पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश से लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। सोमवार को दोपहर तक ओटू में ही 5 एमएम बरसात हुई। जबकि अन्य स्थानों पर मामूली बूंदाबांदी हुई। रविवार को जहां डबवाली के दो गांवों में छत गिरने से मां-बेटी की मौत हो गई थी। वहीं सोमवार दोपहर करीब 12.30 पर चोपटा क्षेत्र के गांव रूपावास के खेतों में बने ट्यूबवेल के कमरे पर बिजली गिर गई। इससे पूरा मकान ध्वस्त हो गया। गनीमत ये रही कि हादसे के वक्त मकान में कोई व्यक्ति नहीं था। अन्यथा जानी नुकसान भी हो सकता था। किसान को पड़ोस के किसान ने घटना के बारे में जानकारी दी।
जानकारी के अनुसार गांव रुपावास निवासी रविंद्र पुत्र धर्मपाल का खेत गांव के नजदीक से गुजरने वाली बरूवाली माइनर के साथ लगता है। खेत में रविंद्र ने ट्यूबवेल लगवाया हुआ है। इसके नजदीक कमरा बनाकर उसमें विद्युत सप्लाई का सिस्टम फिट गया है। सोमवार की दोपहर बूंदाबांदी के बीच करीब साढ़े 12 बजे अचानक आसमान से बिजली ट्यूबवेल के कमरे पर जा गिरी। जिससे पूरा कमरा ध्वस्त हो गया। गनीमत रही कि घटना के वक्त कमरे में कोई व्यक्ति नहीं था। पड़ोस के किसान रामस्वरूप पूनियां ने रविंद्र को फोन कर घटना के बारे जानकारी दी। घटना की सूचना मिलने के बाद काफी संख्या में किसान मौके पर पहुंच गए। सूचना मिलने पर पुलिस व विद्युत निगम के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। बिजली गिरने से कमरे में लगा ट्यूबवेल का स्टार्टर, केबल व अन्य सामान जल गया।
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नरमा-कपास-गवार की फसलें प्रभावित:
पिछले तीन दिनों से लगातार हो रही बरसात का सबसे बड़ा नुकसान किसानों को उठाना पड़ा है। एक तो पहले ही किसान कर्जे की मार झेल रहा है। रही सही कसर बरसात ने पूरी कर दी। बरसात के कारण किसानों की नरमा-कपास-ग्वार की फसलें प्रभावित हो चुकी हैं। किसान जगदीश, पवन कुमार, प्रेम कुमार, रायसिंह, मनीराम, भीम सिंह, बलदेव सिंह, मलकीत सिंह ने बताया कि उनकी नरमा-कपास व ग्वार व धान की फसलें अगेती थी। इस बारे बेशक बरसात कम हुई। लेकिन फसलें काफी अच्छी थी और बेहतर उत्पादन की उम्मीद थी। वे नरमा-कपास की अगेती फसलों की चुगाई में लगे हुए थे। लेकिन शनिवार से अचानक मौसम में आए बदलाव व लगातार हो रही बरसात ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया है। बरसात से न केवल फसलें प्रभावित हुई हैं। बल्कि उत्पादन पर भी असर पड़ेगा। यही नहीं धान की फसलें पूर्णतया धरती पर बिछ गई हैं।
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