अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा। दस्तावेजों से छेड़छाड़ करके न्यायालय को गुमराह करने के मामले सिरसा अदालत डीएसपी हेडक्वार्टर सहित तीन पुलिस अधिकारियाें को नोटिस जारी करके तलब किया है। उक्त अधिकारियों ने 45 लाख रुपये की धोखाधड़ी मामले में कोर्ट को गुमराह करने के लिए केस से जुडे़ दस्तावेजों से छेड़छाड़ की है।
सदर थाना के तत्कालीन प्रभारी एवं मौजूदा समय में डीएसपी दलीप सिंह, डीएसपी हेड क्वार्टर विजय कक्कड़ ने कोर्ट में लिखित रूप में बयान दिए उसमें काफी अंतर सामने आ गया। कोर्ट ने साइनों की रिपोर्ट मधुबन से मांगी थी उसमें जवाब आया है कि एस अक्षर से छेड़छाड़ की गई है और वो साफ नहीं दिखाई दे रहा। कोर्ट ने सदर थाना प्रभारी दिनेश कुमार से पूछा कि जब कोर्ट से पुलिस ने साइन वाले दस्तावेज लिए उसमें साइन बिलकुल साफ हैं ऐसे में छेड़छाड़ कैसे हुई।
कोर्ट ने पुलिस ने मधुबन जांच के लिए भेजी गई साइन की कॉपी मांगी, लेकिन सदर पुलिस ने पुलिस को कॉपी देनी की बजाए जवाब दाखिल किया कि साइन की कॉपी ही गुम हो गई। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट लाखों की धोखाधड़ी के इस मामले में डीएसपी दलीप सिंह, डीएसपी हेड क्वार्टर विजय कक्कड़, तत्कालीन एसपी सतेंद्र गुप्ता सहित पांच लोगों की भूमिका संदिग्ध मानते हुए उन्हें तलब कर चुकी है। इसके बाद अब सिरसा सीजेएम कोर्ट डीएसपी दलीप सिंह, डीएसपी हेड क्वार्टर विजय कक्कड़ व इंस्पेक्टर दिनेश कुमार को एक फरवरी को तलब किया है।
मामले के अनुसार विदेशी कंपनी क्राउन क्रेडिट कॉर्पोरेशन सोसायटी लिमिटेड की पंजाब के अमृसर जिला के तरनतान रोड पर दफ्तर है। साल 2011 में गांव सिकंदरपुर निवासी किसान शमशेर को उसके परीचित रोपड़ निवासी राकेश वर्मा ने बताया कि उक्त कंपनी चार सालों में रुपया डबल करके लोगों को देती है और बैंक आठ से दस साल में एफडी के नाम पर रुपया दोगुणा करके देते हैं। किसान शमशेर सिंह ने कंपनी कार्यालय में जाकर कंपनी के एमडी अमरीक सिंह से संपर्क किया और कंपनी की योजनाओं के संबंध में पूछा। अमृतसर निवासी एमडी अमरीक सिंह ने किसान शमशेर सिंह को बताया कि कंपनी चार साल में रुपया दोगुणा करके देती है। शमशेर सिंह एमडी के बातों पर विश्वास कर बैठा और 45 लाख रुपये का निवेश कंपनी की रुपये दोगुणा करने वाली पॉलिसी में कर दिया। अप्रैल 2015 में पॉलिसी की अवधि पूरी होने पर किसान शमशेर सिंह कंपनी कार्यालय में अपने 90 लाख रुपये लेने पहुंचा। कंपनी के अधिकारी रुपया देने में टालमटोल करने लगे। कुछ दिनों तक शमशेर सिंह ने इंतजार किया और फिर कंपनी के दफ्तर में जाकर अपने रुपये मांगे। वहां उसे पता चला की कंपनी शाखा का एमडी लापता हो गया है। किसान शमशेर सिंह को खुद के साथ धोखाधड़ी का अहसास हो गया। उसने पुलिस थाने जाकर कंपनी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद शमशेर सिंह ने एसीजेएम पवन कुमार की अदालत में याचिका दायर करके न्याय की गुहार लगाई। अदालत ने फैसला सुनाते हुए पुलिस को कंपनी के एमडी अमृतसर निवासी जगजीत सिंह, अमरीक सिंह, रोपड़ निवासी बलजीत सिंह, मोहाली निवासी रजनीश कपूर व रोपड़ निवासी राकेश वर्मा के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया।