एक तरफ जहां सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ जैसे अभियान चलाकर प्रदेश में लिंगानुपात को सुधारने की दिशा में काम कर रही है, वहीं सिरसा जिले में बाल विवाह रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। हर साल बाल विवाह से जुड़ी शिकायतें बढ़ती ही जा रही हैं। इस साल प्रशासन की तरफ से 62 नाबालिग को बालिका वधू बनने से बचाया जा चुका है। यह आंकड़ा चौंकाने वाला है, क्योंकि वर्ष 2016 में प्रशासन के पास 29 शिकायतें आई थीं। इस साल बाल विवाह के मामलों में कमी आने के बजाय इसमें दोगुनी से ज्यादा वृद्धि होती जा रही है। साल को समाप्त होने में अभी 20 दिन शेष बचे हैं। बाल विवाह संरक्षण विभाग का कहना है कि लोगों में जागरूकता का अभाव होने के कारण बाल विवाह के मामले ज्यादा बढ़ रहे हैं। विभाग की ओर से बाल विवाह रुकवाने के साथ-साथ माता-पिता से भविष्य में बच्चों के बालिग होने तक विवाह नहीं करने का शपथ पत्र भरवाया गया है। बाल विवाह में भाग लेना या मदद करने वाला भी अपराध की श्रेणी में आता है और उसे भी सजा हो सकती है। जिलेभर में ग्रामीण क्षेत्रों से बाल विवाह की शिकायतें सबसे ज्यादा आ रही हैं। इस साल में जनवरी से लेकर अब तक बाल विवाह की 72 शिकायतें प्रशासन के पास आ चुकी हैं।
बालासर में रुकवाई बालिका की शादी
रानियां क्षेत्र के गांव बालासर थेहड़ में रविवार शाम को प्रशासन ने एक बालिका की शादी रुकवाई। बाल विवाह संरक्षण विभाग की टीम सही समय पर मौके पर पहुंची, नहीं तो बालिका की शादी हो जाती। वर-वधू के फेरों की तैयारी हो चुकी थी। डीजे पर बज रहे पंजाबी गानों पर बाराती नाच रहे थे। इसी बीच प्रशासन की टीम पुलिस साथ लेकर शादी समारोह में आई गई। बाल विवाह निषेध अधिकारी सहायक तरूण चुघ ने परिजनाें से लड़की का आयु प्रमाण पत्र मांगा, दस्तावेजों में लड़की की आयु 18 वर्ष से कम निकली। लड़की के परिजनों ने अधिकारियों को बताया कि उन्हें नहीं पता था कि 18 वर्ष से पहले लड़की की शादी करना अपराध होता है। अब लड़की की शादी उसके बालिग होेने पर ही करेंगे। शादी रुकने के बाद बारात वापस लौट गई। फतेहाबाद के गांव मोतीवाली से बारात लेकर आए दूल्हे के घरवालों ने भी लड़की के परिजनों की बात पर सहमती जताई।
बाल विवाह रुकवाने का आंकड़ा
वर्ष 2011 25
वर्ष 2012 43
वर्ष 2013 51
वर्ष 2014 36
वर्ष 2015 38
वर्ष 2016 29
वर्ष 2017 62
दो साल कैद की सजा
बाल विवाह कराने वालों के लिए अधिकतम दो साल कैद और एक लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है। जिले में ज्यादातर लोगों को बाल विवाह संबंधित कानून का ज्ञान नहीं। अगर लोगों को इस अपराध की सजा का पता हो तो बाल विवाह के बढ़ते मामलों में कमी आ सकती है। जिला में सरकार की ओर से जागरूकता अभियान जमीन स्तर पर नहीं चलाए जा रहे। कागजों में ही अभियान की खानापूर्ति की जा रही है। इसी कारण से लोगों में जागरूकता का अभाव बना हुआ है।
जनता दे सहयोग
बाल विवाह की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं, जैसे ही बाल विवाह की सूचना मिलती है तुरंत पुलिस के सहयोग से मौके पर पहुंचकर शादी रुकवा दी जाती है। नाबालिग के अभिभावकों से लिखित में शपथ पत्र लिया जाता है कि बालिग होने पर ही शादी करवाएंगे। बाल विवाह रुकवाने में जन सहयोग की अहम भूमिका है। सूचना देने वाले का नाम गुप्त रखा जाता है। इस वर्ष 62 बाल विवाह जन सहयोग से रुकवाए जा चुके हैं।
-तरुण चुघ, सहायक बाल विवाह निषेध अधिकारी, सिरसा।
समाज में जागरूकता लानी जरूरी
बाल विवाह एक अपराध है लेकिन पारंपरिक रूप से भारतीय समाज में यह प्रथा चलती आ रही है, इसलिए बाल विवाह के खिलाफ शिकायतें कम ही दर्ज होती हैं। बाल विवाह के चलते लड़कियां पढ़ाई पूरी नहीं कर पातीं और साथ ही यौन शोषण और घरेलू हिंसा के कई मामले सामने आते हैं। बाल विवाह रोकने का केवल मात्र एक ही कारगर तरीका है, और वो है जागरूकता। समाज में जागरूकता आने पर ही बाल विवाह पर रोक लगाई जा सकती है।
-मोनिका चौधरी, सामाजिक कार्यकर्ता।