गांव रत्ताखेड़ा के निलंबित सरपंच अनिल कालवा की मुश्किलें कम नहीं हो रही। बीडीपीओ ने सरपंच के खिलाफ ओढां थाना में रिपोर्ट भेजकर पद का दुरुपयोग कर पंचों का मानदेय हड़पने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
वहीं, बीडीपीओ ने सरपंच को नोटिस भेजकर राशि एक सप्ताह के भीतर ब्याज सहित जमा करवाने को कहा है। दरअसल पंच मदन लाल व रजनी पुरोहित ने शिकायत दी थी कि तत्कालीन सरपंच अनिल कालवा ने पंचों को काफी समय से उनका मानदेय नहीं दिया। इस मामले में करीब एक वर्ष तक जांच की प्रक्रिया चलती रही। जांच में सामने आया कि अनिल कालवा के पास पंचायत के 2 लाख 48 हजार 300 रुपये नगद है। दोषी साबित होने के बाद बीडीपीओ ने अनिल पर एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की है।
वहीं, अनिल कालवा को 18 फीसदी ब्याज सहित राशि एक सप्ताह के भीतर पंचायती खाते में जमा करवाने के आदेश दिए हैं। पंच रजनी पुरोहित व मदन लाल के अनुसार पंचों को प्रति माह एक हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। सरपंच अनिल कालवा ने अपने समय में पंच रजनी को 15 माह व पंच मदन लाल को मात्र 12 माह का ही मानदेय दिया गया। उन्होंने बताया कि सरपंच बैंक से मानदेय के रूप में पैसे निकलवाता रहा, लेकिन पंचों का मानदेय स्वयं हड़पता रहा। इसके बाद उन्होंने उपायुक्त को शिकायत भेजी। इस मामले की जांच बीडीपीओ कार्यालय द्वारा की गई तो सामने आया कि अनिल कालवा ने पंचों के मानदेय की 2 लाख 48 हजार 300 रुपये की राशि कैश-इन-हैंड रख ली।
गौरतलब हो कि गांव के एक व्यक्ति द्वारा गबन करने की शिकायत के आधार पर जांच उपरांत विगत वर्ष की 13 अगस्त को सरपंच अनिल कालवा को सस्पेंड कर दिया गया था। जिसके बाद पंच सतवीर सरोवा को कार्यवाहक सरपंच चुना गया।
निलंबित सरपंच अनिल कालवा के खिलाफ पंचों को मानदेय न देने की शिकायत चल रही थी। जांच उपरांत आरोप सही साबित हुए। जांच में सामने आया कि सरपंच ने 2 लाख 48 हजार 300 रुपये नगद रखे हैं। हमने निलंबित सरपंच से पंचों को दिए गए मानदेय का रिकॉर्ड भी मांगा था, लेकिन वह प्रस्तुत नहीं कर सका। निलंबित सरपंच पर कार्रवाई करने के लिए ओढां पुलिस को पत्र भेज दिया गया है। इसके अलावा निलंबित सरपंच को नोटिस भी भेजकर एक सप्ताह के भीतर राशि ब्याज सहित जमा करवाने के लिए कहा गया है।
- भगवान दास, एसईपीओ (डबवाली)।