सफेद मक्खी और मौसम से खराब हुई फसलों की गिरदावरी के बावजूद मुआवजा मिलने से नाराज किसानों ने शुक्रवार को रोष मार्च निकाला।
इस दौरान भर से आए किसानों ने नगर में रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय में जमकर प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों की जिद पर उपायुक्त को धरनास्थल पर आकर ज्ञापन लेना पड़ा।
उपायुक्त ने कहा कि गिरदावरी की जांच के बाद ही मुआवजा तय किया जाएगा साथ ही उन्होंने बिजली बिल समय पर जमा करने का अनुरोध करते हुए कहा कि सरकार कुछ रियायत जरूर करेगी।
उधर प्रदर्शनकारी किसानों ने कहा कि अगर इस बार मांगे न मानी तो नगर में दूध की आपूर्ति बंद कर दी जाएगी।
शुक्रवार को जिले भर से आए किसान और ग्रामीण टाउन पार्क में एकत्रित हुए। जहां पर सभा आयोजित करने के बाद सभी किसान मार्च करते हुए लघु सचिवालय पहुंचे और उपायुक्त को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर तुरंत प्रभाव से मुआवजा वितरित करने की मांग की।
इससे पूर्व टाउन पार्क में हरियाणा किसान मंच के बैनर तले किसानों की सभा का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा, जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश, साहबराम नेहरा, सुरेश ढाका, धन्नाराम, राजीव, परमजीत माखा, हरनेक सिंह, गुररत्नपाल किंगरा, प्रकाश सिहाग, रामसिंह, स्वर्ण सिंह विर्क आदि उपस्थित हुए।
किसान मंच के नेताओं ने कहा कि सरकार ने ओलावृष्टि से नष्ट फसल की गिरदावरी भी केवल दिखावा थी क्योंकि यदि सरकार का उद्देश्य किसानों के हुए नुकसान की भरपाई करने का होता तो गिरदावरी के तुरंत बाद किसानों को मुआवजा वितरित किया जाना चाहिए था, लेकिन गिरदावरी करने के दो माह बाद भी मुआवजा नहीं दिया गया है, जिससे किसान अपना कर्ज नहीं उतार पाए हैं।
उन्होंने कहा कि कच्चे तेल की कीमतें भारी मात्रा में गिरने के बाद उम्मीद जगी थी कि डीजल व पेट्रोल की कीमतों में चार से पांच रुपये कमी हो जाएगी, लेकिन सरकार ने इसमें भी चाल चलते हुए टैक्स बढ़ा दिया, जिस कारण कीमतों में केवल 50 पैसे की कमी ही हो पाई।
उन्होंने कहा कि सब लोग जान चुके है कि सरकार किसान हितैषी नहीं है। किसान नेताओं ने कहा कि विधानसभा चुनाव दौरान भाजपा के नेताओं ने अपनी जनसभाओं में कहा था कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कर किसानों को लाभ देंगे, लेकिन केंद्र व प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के डेढ़ वर्ष से भी अधिक समय होने के बाद भी इस रिपोर्ट को लागू नहीं किया जा रहा।
मंच पर नेताओं ने कहा कि प्रतिदिन लावारिस गोवंश के कारण शहरों में कोई दुर्घटना होने से किसी की मौत होने अथवा गांवों में खेतों में घुसकर फसलों को नष्ट करने के समाचार मिलते रहते हैं, लेकिन गो प्रेमी होने का दंभ भरने वाले प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री इनके लिए गोशालाएं खोलकर उन्हें वहां आश्रय देने की दिशा में कोई काम नहीं कर रही, जिससे आम जनता तथा किसानों का नुकसान हो रहा है।
उन्होंने ज्ञापन के माध्यम से नष्ट फसलों का मुआवजा देने, बिजली की बढ़ाई कीमतों की दरों को वापस लेने, लावारिस पशुओं का स्थाई समाधान करने, किसानों की जमीन नीलाम करना बंद करने तथा किसानों को कर्ज मुक्त करने की मांग की।
दो कदम तुम भी तो आगे आओ
लघु सचिवालय में धरने पर बैठे किसानों से ज्ञापन लेने के लिए जिला राजस्व अधिकारी अमीचंद सैनी धरना स्थल पर आए तो प्रदर्शनकारियों ने कहा कि डीसी को ही ज्ञापन लेने आना पड़ेगा।
इसके बाद में जिला परिवहन अधिकारी नरेंद्र पाल सिंह मौके पर आए तो उन्हें भी ज्ञापन नहीं दिया। फिर दोनों अधिकारियों ने किसान नेता प्रहलाद सिंह से बातचीत की तो उन्होंने साफ कर दिया कि उपायुक्त को ही ज्ञापन लेने आना पड़ेगा।
बाद में उपायुक्त मुख्य गेट तक आए और किसानों से ज्ञापन देेने के लिए कहा तो प्रहलाद ने कहा कि किसानों के बीच में आना पड़ेगा जिस पर उपायुक्त ने कहा कि दो कदम वे भी आगे आ जाएं साथ ही उन्होंने किसानों को आने का इशारा किया तो किसान नेताओं ने आगे बढ़कर ज्ञापन सौंप दिया।
उपायुक्त ने कहा कि गिरदावरी की जांच के बाद ही मुआवजा तय होगा। उन्होंने लोगों से समय पर बिजली बिल भरने के लिए कहा। इस बीच एक किसान ने उठकर चेतावनी देते हुए कहा कि अगर इस बार मांगे नहंी मानी तो नगर में दूध की आपूर्ति ठप कर दी जाएगी।