मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जिले की 67 गोशालाओं के प्रबंधकों को 7 करोड़ 2 लाख रुपये की चारा अनुदान राशि के चेक सौंपे। राशि वितरण कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि प्रदेशभर की गोशालाओं को 800 ई-रिक्शा उपलब्ध करवाई जाएंगी, जिसकी खरीद प्रक्रिया चल रही है। इस वर्ष प्रदेश की 605 गोशालाओं के लिए कुल 88 करोड़ 50 लाख रुपये की चारा अनुदान के रूप में दिए जा रहे हैं।
राजेंद्रानंद महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए सीएम ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सामाजिक कार्यों को आगे बढ़ाएं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने बड़ोपल के विकास के लिए 21 लाख रुपये देने तथा बड़ोपल में वन्य जीव उपचार केंद्र का नाम राजेंद्रानंद महाराज के नाम पर रखने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 101 गोशालाओं को 6 करोड़ 50 लाख रुपये मशीन खरीदने के लिए दिए गए हैं। इससे पंचगव्य उत्पादन का मार्ग सुलभ होगा। बीते साढ़े 10 वर्षों में चारे के लिए 358 करोड़ 50 लाख रुपये की अनुदान राशि दी जा चुकी है। अब तक 330 गोशालाओं में सोलर ऊर्जा प्लांट लगाए जा चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 तक प्रदेश में केवल 215 पंजीकृत गोशालाएं थीं, जिनमें एक लाख 75 हजार गोवंश का पालन-पोषण होता था। अब 686 पंजीकृत गोशालाएं हैं। वर्तमान में 4 लाख बेसहारा गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। 2014-15 में गोसेवा आयोग के लिए मात्र 2 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 595 करोड़ रुपये कर दिया है। गोवंश के पुनर्वास के लिए 200 गोशालाओं को शेड निर्माण के लिए प्रति गोशाला 10 लाख रुपये की अनुदान राशि दी गई है। इनमें से 51 गोशालाओं में शेड बनकर तैयार हो चुके हैं।
हमारी संस्कृति से जुड़ी है गाय : मंत्री
समारोह में कृषि, किसान कल्याण एवं पशुपालन मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि गाय हमारी संस्कृति से जुड़ी हुई है। गाय का ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। देसी गाय के दूध में औषधीय गुण होते हैं और गाय में पंचतत्व समाहित हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों में गोसेवा के प्रति जागरूकता पैदा करना है।