डबवाली सबडिवीजन कार्यालय में चालीस साल बाद स्वच्छता अभियान चला। करीब पांच घंटे की कड़ी मेहनत के बाद कर्मचारियों ने एक ट्रक कागजात बाहर निकाले। वर्षों से बंद एक कमरा भी खुल गया। रिकॉर्ड को समाप्त करने के लिए करनाल भेजा जाएगा।
डबवाली के कार्यकारी एसडीएम प्रशांत कुमार ने पिछले दिनों कार्यालय के कर्मचारियों सहित सबडिवीजन में स्थित सभी सरकारी कार्यालयों को आदेश जारी करके पुराना रिकॉर्ड नष्ट करने के लिए निकालने के आदेश दिए थे। उनके कार्यालय के कर्मचारियों ने रविवार को इसकी शुरूआत सुबह सात बजे की। कर्मचारियों ने बरसों पुरानी लर्निंग, रजिस्ट्रेशन तथा डीएल फाइलों को बाहर निकालना शुरू कर दिया। करीब पांच घंटे में एक कमरा भर दिया। करीब एक ट्रक पुराना रिकॉर्ड नष्ट करने के लिए निकाल दिया।
इस दौरान 1976 से लेकर 31 दिसंबर 2012 तक का रिकॉर्ड नष्ट होगा। यह पहला मौका था जब सबडिवीजन कार्यालय में सफाई हो रही थी। एक सितंबर 1976 को डबवाली को सबडिवीजन का दर्जा मिला था। उसके बाद आज तक कार्यालय में दनादन फाइल गिरती रहीं। काफी रिकॉर्ड एक कमरे में जमा हो गया था। जिसके बाद कमरा बंद ही रहता था।
हालांकि सरकार ने वर्ष 2009 में एक अधिनियम पास करके इस रिकॉर्ड को नष्ट करने के आदेश जारी किए थे। लेकिन अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। अब उपरोक्त नियमों का हवाला देते हुए ही कार्यकारी एसडीएम प्रशांत कुमार ने बेहतर फैसला लिया है। कार्यालय से स्वच्छता का शुभारंभ करने के बाद एसडीएम सभी सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण करके अभियान की सुध लेंगे।
यह है रूल
रिकॉर्ड मेनटेन रूल 2009 के तहत सरकारी कार्यालयों को तीन वर्षों का रिकॉर्ड रखना जरूरी होता है। इस रूल को बने करीब सात साल होने के बावजूद कई विभाग ऐसे हैं, जो पुराने रिकॉर्ड पर बैठकर काम करते हैं।
रिकॉर्ड को खुद नष्ट नहीं कर सकते
पुराने रिकॉर्ड को नष्ट करने का अधिकार नहीं है। इसे करनाल भेजा जाता है। निकाले गए रिकॉर्ड का पहले रजिस्टर तैयार किया जाता है या फिर उसे कंप्यूटराइज्ड किया जाता है। इसके बाद उपरोक्त कार्यवाही होती है। कुछ भी कहें रिकॉर्ड को जलाने के लिए कर्मचारियों को पसीना तथा सरकार को रुपये खर्च करने पड़ते हैं। अब डबवाली से रिकॉर्ड को करनाल भेजने पर हजारों रुपये व्यय होंगे।