कृषि कानूनों के खिलाफ हरियाणा के किसानों का नेतृत्व कर रहे किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूनी सोमवार को सिरसा पहुंचे। उन्होंने जनता भवन में लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार अपने गुंडों से आंदोलनकारियों से हमला करवा रही है। लठ मरवाना है तो पुलिस से मरवाए। न केंद्र सरकार मान रही है और न ही हम मानेंगे।
चढ़ूनी ने कहा कि आंदोलन में 200 किसान मर चुके हैं। सरकार हठधर्मी पर अड़ी हुई है। केंद्र सरकार का मन काला है और कालेे मन से कानून बनाए गए है। सरकार देश को आर्थिक गुलाम बनाएगी। राजा ही जनता को गुमराह कर रहा है। पीएम कहते हैं कि एक कॉल की दूरी है, लेकिन कॉल करने से पीएम को कौन रोक रहा है। उन्होंने कहा कि राकेश टिकैत ने मजाक में बोल दिया कि अक्तूबर तक समय है सरकार के पास। 2024 भी आ जाए, आंदोलन चलेगा। हम आंदोलन को पूरे देश में फैलाने के लिए किसानों को जोड़ रहे हैं। वहीं, गुरनाम सिंह चढ़ूनी डबवाली में खुईयां मलकाना टोल प्लाजा पर रुके और वहां धरनारत किसानों को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि किसानों के समक्ष सवाल अपने रोजगार का है और हमें अपना रोजगार बचाना है। हमारे पास दो चीज हैं, एक हमारी फसल और दूसरी मजदूरी। आज हमारे पास फसल का न्यूनतम भाव भी नहीं है। पूरे देश का हिसाब लगाएं तो एक साल में उससे भी 3 से 4 लाख करोड़ रुपये कम हमारी जेब में आता है। शहर में मजदूरी के लिए जाने वाले युवाओं को छह हजार से आठ हजार रुपये महीना ही मजदूरी बनती है और 11-11 घंटे काम करना पड़ता है जबकि न्यूनतम रेट 8 घंटे का भी 9500 रुपये बनता है। इसका मतलब है कि हमारे लोगों को कम से कम मजदूरी भी नहीं मिलती बल्कि उसका आधा ही मिल पाता है। यही दो चीज हैं जो देश की जीडीपी बढ़ाती हैं, जो देश का लेन-देन बढ़ाती हैं और देश को समृद्ध करती हैं, लेकिन हमारी फसल भी लूट रही है और मजदूरी भी पूरी नहीं मिल रही। हमें पूरे वर्ल्ड की मार्केट का मुकाबला भी करना है। रोजगार बचाने की यह लड़ाई हमें लड़नी ही पड़ेगी, क्योंकि इसके अलावा हमारे पास जिंदा रहने का कोई और चारा भी नहीं है। हम लोग शौक से नहीं बल्कि मजबूरी में यह लड़ाई लड़ रहे हैं।