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किसान बोले- सरकार खेती के लिए मूलभूत सुविधाएं देने की बजाय थोप रही नए कानून

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राजस्थान की सीमा से सटे पैंतालिसा क्षेत्र में किसानों को नहरी पानी की कमी, सेम की समस्या सहित कई प्रकार की परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। किसान सरकार द्वारा लाए गए वर्तमान में तीन कृषि कानूनों को भी गलत बता रहेे हैं। इनका है कि किसानों को खेती करने के लिए मूलभूत सुविधाएं देने की बजाय सरकार नए-नए कानून थोप कर किसानों पर अन्याय कर रही है।
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किसान दिवस पर जब चोपटा खंड के गांव माखोसरानी में किसानों से बात की गई तो किसानों ने अपना दर्द इस तरह बयान किया। किसान विनोद कुमार ने बताया कि उन्होंने अपनी नरमे की फसल का बीमा करवाया था और फसल खराब हो गई। लेकिन उन्हें बीमा नहीं मिला। सरकार घोषणाएं तो बार-बार कर देती है लेकिन उसका फायदा किसान को नहीं मिल पाता। उनका कहना है कि सरकार को तीनों कृषि कानून तुरंत प्रभाव से वापिस लेकर किसानों को मूलभूत सुविधाएं पानी, बिजली इत्यादि मुहैया करवाए तो पैदावार ठीक हो सकती है और आमदनी भी बढ़ सकती है।
किसान रमेश कुमार ने बताया कि सरकार ने नहरी पानी में कटौती करके उनके साथ धोखा किया है अब उनकी फसलें सिंचाई के अभाव में सूखने लगी हैं। सरकार ने ऐन वक्त पर आकर नहरी पानी की कटौती कर दी है। इससे फसलों का उत्पादन काफी कम हो जाएगा। एक तरफ तो सरकार आमदनी बढ़ाने की बात करती है, दूसरी तरफ नहरी पानी जैसी आवश्यक सुविधाओं में कटौती करके किसानों के साथ अन्याय कर रही है।
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किसान कालूराम ने बताया कि पहले खेती मुनाफे का सौदा होती थी लेकिन अब चार-पांच सालों में खेती पूरी तरह से घाटे का सौदा बन गई है। सरकार बार-बार किसानों पर नए-नए कानून थोप कर किसानों की आर्थिक हालत कमजोर कर रही है।
किसान साधु राम का कहना है कि सरकार को तीन कृषि काले कानून वापस लेने चाहिए। इन कानूनों से किसानों को कोई फायदा नहीं होगा बल्कि कारपोरेट घरानों को ही फायदा होना है। किसान और ज्यादा गरीब हो जाएगा सरकार के तानाशाही पूर्ण रवैया से लोगों का जीना दूभर हो जाएगा।
किसान महेंद्र सिंह का कहना है कि सेम की समस्या काफी विकराल बनी हुई है। सरकार इस और कोई ध्यान नहीं दे रही है। चुनाव के समय तो सेम की समस्या खत्म करने का झुनझुना बजा दिया जाता है, लेकिन चुनाव के जाते ही इस और कोई ध्यान नहीं देता। पिछले 28 वर्ष से खेतों में एक दाना भी नहीं हुआ है इस तरह से तो 2022 तक आय दुगनी तो क्या उनकी जमीन में एक दाना उग जाए तो भी अच्छा समझेंगे।
किसान जगदीश चंद्र का कहना है कि खेती करने के लिए खेतों में पक्के खाल, नहरी पानी पर्याप्त मात्रा में मिले, असली खाद, बीज मिले तो किसान खुद-ब-खुद अच्छी पैदावार लेकर आमदनी बढ़ा सकता है लेकिन सरकार अपनी मनमर्जी करके किसानों पर अत्याचार कर रही है।
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