पुलिस ने साइबर ठगी से जुड़े गिरोह के सरगना और अन्य गुर्गों की तलाश के लिए सीआईए शुक्रवार को पंजाब के रोपड़, मानसा, चंडीगढ़ और राजस्थान के जयपुर में दबिश देगी। आरोपियों ने पुलिस पूछताछ में बताया है कि ऑनलाइन ठगी के लिए उन्होंने हरियाणा और पंजाब से जुड़े युवकों का व्हाटसएप ग्रुप बनाया हुआ है। इस ग्रुप का एडमिन पंजाब का है। वही इस खेल का सरगना है। बता दें कि सिरसा पुलिस बीते दो दिनों में दो गिरोह के 11 गुर्गों से 607 सिम, 22 मोबाइल फोन और दो लैपटॉप बरामद कर चुकी है।
पुलिस ने सात आरोपियों को वीरवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से इन सभी आरोपियों को तीन दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। इन सातों आरोपियों से पुलिस ने 327 सिम, 11 मोबाइल फोन व एक लैपटॉप बरामद किया था।
एसपी भूपेंद्र सिंह ने बताया कि सीआईए प्रभारी इंस्पेक्टर नरेश कुमार, उप निरीक्षक राजपाल व सहायक उप निरीक्षक अवतार सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम को जानकारी मिली थी कि कुछ लोग गांव शेरपुरा क्षेत्र में फर्जी आईडी पर भारी मात्रा में सिम लाकर फर्जी दस्तावेजों के सहारे ऑनलाइन ठगी का धंधा कर रहे हैं। इसके बाद दबिश दी गई थी। इस दौरान सीआईए ने अजय कुमार, संजय, गोविंद सिंह, विकास, दर्शन सिंह, संजय निवासी शेरपुरा व हर्ष निवासी जोधकां को डिंग मंडी क्षेत्र के गांव शेरपुरा से दबोचा गया। इससे पहले बुधवार को भी चार गुर्गों को पकड़ कर उनके पास से पुलिस ने 280 सिम, 11 मोबाइल व एक लैपटॉप बरामद किया।
पुलिस जांच में सामने आया है कि पकड़े गए सातों आरोपियों ने विभिन्न कंपनियों के सिम जाली दस्तावेजों के आधार पर प्राप्त किया था। ये बदमाश उनके माध्यम से अमेजन, धनी, पे-जैप जैसी ऑनलाइन कंपनियों द्वारा उपभोक्ता को दिए जाने वाली नगद राशि उड़ा लेते थे। आरोपी फर्जी सिम पर फर्जी आईडी बनाकर कैश बैक लेकर कंपनियों को लाखों रुपये का चूना लगा रहे थे।
आरोपियों ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि गिरोह के सरगना संदेश भेजकर युवाओं को अमीर बनाने का लालच देते हैं। आरोपी युवा ऑनलाइन ठगी के लिए पंजाब के इन गिरोह से 100 रुपये प्रति सिम के हिसाब से एक्टिव सिम लाते थे और इसे प्रयोग करते थे। एक बार प्रयोग करने के बाद इसे वे आगे गिरोह के दूसरे गुर्गों को 70 से 80 रुपये में बेच देते थे। आरोपी एक बार में एक साथ 1000 सिम लेकर आते थे। अब सीआईए साइबर ठगी के इस गैंग के अन्य गुर्गों की तलाश में पंजाब के रोपड़, मानसा, चंडीगढ़, जयपुर में दबिश देगी। वहीं, सीआईए पकड़े गए आरोपियों के बैंक एकाउंट की डिटेल भी खंगालेगी, ताकि पता किया जा सके कि आरोपियों ने कितना पैसा इस धंधे से कमाया है। साथ ही सभी सिम कंपनियों को सिम की आईडी नंबर, सिम नंबर और किसके नाम पर सिम जारी हुआ, इसकी जानकारी जुटाई जाएगी।
शेरपुरा के संजय को कभी थे खाने के लाले, आज गांव में आलीशान कोठी
शेरपुरा गांव के सात युवकों के गिरोह के सरगना संजय उर्फ लाला व उसका चचेरा भाई संजय है। दोनों ने ही गांव में पहले यह काम शुरू किया। जानकारी के अनुसार संजय के कभी खाने के लाले थे, लेकिन अब दोनों ने गांव में आलीशान मकान बनाया। दोनों चचेरे भाई गांव में महंगी गाड़ी में घूमते थे और दूसरे युवाओं को अपने धंधे में शामिल करने के लिए कमीशन का लालच देते थे। युवाओं को दो से तीन हजार रुपये दिए जाते थे। इसी के चलते ही संजय उर्फ लाला ने अपने साथ गांव के अन्य युवकों को मिला लिया। गिरोह में शामिल शेरपुरा का ही दर्शन सिंह सिरसा के ही एक कॉलेज का स्टूडेंट्स है। वहीं आरोपी अजय भी अच्छे खासे घर से है, उसके पिता खेती के साथ साथ सीमेंट, रेता बजरी की दुकान करते हैं। आरोपी विकास के पिता खेती के साथ साथ लकड़ी मिस्त्री का काम करते हैं। सभी सात आरोपी 18 से 24 साल की उम्र तक के हैं।