सिरसा। शहर में शुक्रवार को पूर्वांचल समाज के लोगों ने नहाय खाय से छठ पूजा का आगाज किया। महिलाओं ने छठ मैया का व्रत रखा। इसके बाद महिलाओं ने चने की दाल, लौकी का प्रसाद तैयार कर पहले छठ मैया को भोग लगाकर फिर स्वयं ग्रहण किया। वहीं दिल्ली पुल पर रजवाहे के पास श्रद्धालुओं ने छठ मैया की पूजा की।
बता दें कि पूर्वांचल के लोगों ने छठ पूजा को लेकर बड़े स्तर पर तैयारी करते हैं। पहले दिन महिलाओं ने सबसे पहले स्नान किया। इसके बाद महिलाओं ने छठी मैया की पूजा के लिए स्थान चयनित की और उस पर गंगाजल का छिड़काव कर पवित्र किया। अब 18 नवंबर यानी शनिवार शाम को अर्घ्य दिया जाएगा। 20 नवंबर को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत संकल्प पूरा होगा।
वहीं पर्व के दौरान कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए जिला पुलिस प्रशासन की तरफ से भी कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए गए हैं। छठ पूजा घाट मेले में पुलिस पीसीआर और राइडर भी गश्त पर रहे।
आज होगा खरना
छठ पूजा पर्व के दौरान दूसरे दिन शनिवार को खरना किया जाएगा। इस दिन रसियाव (गुड़ चावल की बनी खीर) का सेवन करके 36 घंटे के व्रत की शुरुआत होती है। मुख्य प्रसाद ठेकुआ बनाया जाता है। कुछ महिलाएं इस छोटी छठ के दिन भी व्रत रखती हैं और अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती हैं। खरना के दिन दिनभर निर्जला व्रत रहकर रात में रसियाव का सेवन किया जाता है। रविवार को छठ पर्व के दिन शाम को पानी की खड़े होकर व्रती अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
घाट पर पूरी रात होगा भजन संकीर्तन
शहर के हिसार रोड पर स्थित नहर के आसपास श्रद्धालु द्वारा साफ सफाई कर घाट बनाए गए हैं। इन्हीं जगहों पर श्रद्धालुओं की ओर से छठ मैया को सजाया गया है। जिसकी श्रद्धालु अगले दो दिनों तक पूजा अर्चना की जाएगी। वहीं आस पास पंडाल भी सजाए गए है। जहां पर रात भर गायक भजन संकीर्तन करेंगे।
जानिए क्या है छठ पूजा की मान्यता
छठ पूजा का पर्व संतान की लंबी के लिए मनाया जाता है। छठ पूजा का व्रत 36 घंटों तक चलता है। महिलाएं ये व्रत अपनी संतान की लंबी उम्र, स्वास्थ्य व उज्ज्वल भविष्य की कामना के लिए रखती है। छठ पूजा का व्रत सबसे कठिन व्रत माना जाता है। इस व्रत को रखने के लिए सभी नियम मानने होते हैं।