कालांवाली/ओढां। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में चार लाख बच्चों के फर्जी दाखिले की चल रही सीबीआई की जांच कालांवाली व गांव नुहियांवाली के सरकारी स्कूल में पहुंची। इंस्पेक्टर सुखविंदर सिंह के नेतृत्व में सीबीआई चंडीगढ़ की दो अलग-अलग टीमों ने राजकीय प्राथमिक पाठशाला कालांवाली पांच घंटे और राजकीय प्राथमिक पाठशाला नुहियांवाली में करीब तीन घंटे तक रिकाॅर्ड खंगाला।
टीम ने वर्ष 2014-15 और 2015-16 में इन स्कूलों में होने वाले नामांकन संख्या, ग्रांट रजिस्टर, ट्रेजरी रिकाॅर्ड, इंसेंटिव, कैशबुक, वर्दी व स्टेशनरी इत्यादि का ब्यौरा जांचा। कालांवाली में इस अवधि के दौरान स्कूल से काटे गए करीब 69 विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों से भी गहनता से पूछताछ की गई।
वहीं नुहियांवाली में टीम ने सत्र 2014-15 व 2015-16 में स्कूल छोड़ चुके 48 बच्चों का ब्यौरा मांगा। स्कूल प्रबंधन ने उक्त बच्चों को फोन कर स्कूल में बुलाया। कुल 48 में से 26 बच्चे व कई अभिभावक स्कूल में पहुंचे।
दरअसल, साल 2013 में सरकारी स्कूलों में करीब चार लाख फर्जी दाखिलों का मामला सामने आया था। हरियाणा सरकार ने इस पर सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। आरोप है कि मैनुअल दाखिले दिखाकर मिड-डे मील और छात्रवृत्ति का लाभ लिया जा रहा था। साल 2015-16 में एमआईएस पोर्टल पर डेटा अपडेट होने के दौरान यह गड़बड़ी सामने आई थी। इसकी प्रदेशभर में सीबीआई जांच जारी है।
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टीम ने इनसे भी की बातचीत
तख्तमल रोड, मंडी कालांवाली निवासी छात्र रोहित ने बताया कि उक्त अवधि के दौरान वह स्कूल में कक्षा दूसरी में था। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ हलवाई के काम के लिए सूरतगढ़ राजस्थान में चला गया था। हालांकि, कुछ माह बाद उसने आकर दोबारा स्कूल में नाम दर्ज करवा लिया था और कक्षा नौंवी पास करके पढ़ाई छोड़ दी थी। अब वह डेकोरेशन का काम करता है। इसी तरह वार्ड 2 मंडी कालांवाली निवासी परमजीत कौर ने बताया कि उक्त अवधि के दौरान उनके दो बच्चे कक्षा पांचवीं में पढ़ाई करते थे, लेकिन मजदूरी करने के लिए वे संगरिया राजस्थान में चले गए थे। कुछ माह बाद उन्होंने दोबारा दाखिला करवाकर आगे की पढ़ाई कर ली थी। उनकी बेटी अंजलि ने कक्षा बारहवीं करके पढ़ाई छोड़ दी और बेटे साहिल ने कक्षा नौवीं करके पढ़ाई छोड़ दी है। वार्ड 3 मंडी कालांवाली निवासीमनजीत कौर ने बताया कि हमारे संयुक्त परिवार में करीब सात बच्चे थे और उक्त अवधि के दौरान उनकी बेटी ज्योति कक्षा चौथी में थी। बाकी बच्चे राजकीय गर्ल्स माॅडल संस्कृति सीनियर सेकेंडरी स्कूल कालांवाली में जाने के कारण वहां पर उनके साथ ही दाखिला करवा दिया था। अब उनकी बेटी उसी स्कूल में कक्षा ग्यारहवीं में पढ़ाई कर रही है।
गलियों में पुराने विद्यार्थियों को ढूंढ रहे शिक्षक
स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि वर्ष 2014-15 के आस-पास स्कूलों में पढ़े विद्यार्थियों को जांच में सत्यापन के लिए बुलाया जा रहा है। करीब 10 साल पहले मिड-डे-मील या प्रोत्साहन राशि की सूची में जिन विद्यार्थियों के नाम दर्ज थे, अब वे स्कूल छोड़ चुके हैं। स्कूल का स्टाफ भी लगभग सारा बदल चुका है, जिसमें कई शिक्षकों का तबादला हो चुका है तो कई रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में पहले ही शिक्षकों की कमी है। वे खुद कई दिनों से गली-मोहल्लों में जाकर जानकारी जुटा रहे हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित हो रही है। कई बच्चों की पहचान भी नहीं हो पा रही। कई बच्चों की दाढ़ी-मूछें आ गई हैं, कई लड़कियों की शादी हो चुकी है। बड़ी मुश्किलों से जो विद्यार्थी मिल रहे हैं, उन बच्चों व उनके अभिभावकों को बड़ी मिन्नतें करके बुला रहे हैं।
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जिले में 24 अक्तूबर तक जांच करेगी सीबीआई की टीम
सीबीआई चंडीगढ़ की टीम 23 अक्टूबर को खंड रानियां के जीजीपीएस नाथोवाल मोह में, जीपीएस रानियां में, 24 अक्तूबर को सिरसा में जाकर जांच करेगी। इससे पहले टीम खंड बडागुढ़ा, खंड डबवाली, खंड ऐलनाबाद, खंड नाथूसरी चोपटा के दो-दो स्कूलों में जाकर जांच कर चुकी है।
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स्कूल में छात्र संख्या कम हुई
राजकीय प्राथमिक पाठशाला कालांवाली के शिक्षकों के अनुसार साल 2014-15 और वर्ष 2015-16 में स्कूल में बच्चों की संख्या 500 से अधिक थी, जोकि वर्तमान में करीब 258 है। उस अवधि के दौरान इस स्कूल में शिक्षकों की संख्या 12 से 16 थी, जो वर्तमान में घटकर 6 रह गई है। इसका बच्चों की संख्या पर काफी प्रभाव पड़ रहा है।