बडागुढ़ा। कोर्ट के आदेशों पर वर्ष 2020 के एक मामले में बडागुढ़ा थाना के तत्कालीन एसएचओ मनदीप सिंह सहित 6 पुलिसकर्मियों पर बडागुढ़ा थाने में ही मामला दर्ज किया गया है। सभी पुलिसकर्मियों पर पद का दुरुपयोग करते हुए डरा-धमकाकर अवैध रूप से घर से उठाने, तोड़फोड़ करने व रिश्वत लेने के आरोप केस दर्ज किया गया है। इस्तगासे के आधार पर कोर्ट ने यह आदेश जारी किए हैं।गांव भंगू निवासी स्वर्ण सिंह ने बताया कि 14 मार्च 2020 को वह अपने घर पर था। रात करीब 11 बजे सीआईए स्टाफ से पुलिसकर्मी राजेन्द्र सिंह, दीपक गांधी व सतबीर सिंह जोकि शराब के नशे में थे, उसके घर आए और कहा कि उन्हें सूचना मिली है कि उसने अपने नोहरे में अफीम के पौधे लगा रखे हैं। पुलिसकर्मियों ने बिना किसी वारंट के उसके घर की तलाशी लेनी शुरू कर दी और घर का सारा सामान क्षतिग्रस्त कर दिया।
स्वर्ण सिंह के मुताबिक जब पुलिसकर्मियों को तलाशी के दौरान घर से कुछ नहीं मिला तो उन्होंने उसे जबरन उनके साथ चलने के लिए कहा। जब उसने कारण पूछा तो पुलिसकर्मियों ने कहा कि वे कुछ भी कर सकते हैं। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उसे झूठे केस में फंसाने व प्रताड़ित करने की धमकी देते हुए 7 लाख रुपये की मांग की। स्वर्ण सिंह के मुताबिक उसके फोन में इस बात की रिकॉर्डिंग भी है।
स्वर्ण सिंह ने बताया कि ये पूरा घटनाक्रम उसके घर में लगे कैमरों में भी कैद हो गया था, लेकिन पुलिसकर्मी डीवीआर उखाड़कर अपने साथ ले गए। स्वर्ण सिंह का आरोप है कि पुलिसकर्मी उसे साथ ले जाने लगे और कहा कि उसके घर में जितने पैसे हैं वह साथ ले ले। जिस पर उसने घर में पड़े 1 लाख रुपये ले लिए।
जिसके बाद पुलिसकर्मी उसे सिरसा ले गए। बरनाला रोड पर पुलिस लाइन के सामने स्थित एटीएम पर ले जाकर पैसे निकलवाने के लिए दबाव बनाया। पुलिसकर्मियों के दबाव में आकर अपने दोस्त गांव सिंघपुरा गुरजीत सिंह को मौके पर बुलाया कि जो कि उस समय निजी बैंक का कर्मचारी था। गुरजीत सिंह ने भी अपने एटीएम से एक लाख रुपये निकलवाकर पुलिसकर्मियों को दे दिए। स्वर्ण सिंह ने बताया कि पुलिसकर्मियों ने उसे यह कहकर छोड़ा कि वह बाकी पैसों का प्रबंध कर लें अन्यथा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर देंगे।
स्वर्ण सिंह ने बताया कि उसने डर के मारे अगले दिन अपने दोस्त बलराज सिंह से 50 हजार रुपये उधार लिए तथा 2 लाख रुपये अपने अन्य बैंक खाते से निकलवाकर सिरसा पुलिस लाइन में स्थित पुलिसकर्मी राजेन्द्र सिंह के घर दे आया। जिसके बाद पुलिसकर्मियों ने उससे कहा कि अब उस पर मुकदमा नहीं होगा। स्वर्ण सिंह के मुताबिक फिर 15 मार्च 2020 को बडागुढ़ा पुलिस ने जसकरण सिंह नामक व्यक्ति के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया। उक्त मुकदमे में उसे बेवजह बडागुढ़ा थाना में बुलाया गया और दबाव बनाते हुए फिर से पैसे की मांग की गई। उस समय वहां बडागुढ़ा थाना प्रभारी के रूप में मनदीप सिंह व एएसआई सत्यवान तैनात थे।
गृहमंत्री तक की शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई
स्वर्ण सिंह के मुताबिक तीनों पुलिसकर्मियों ने उस पर दबाव बनाते हुए उसे मुकदमे से निकालने की एवज में डेढ़ लाख रुपये ले लिए तथा और पैसों की भी मांग की। जब उसने और पैसे न होने की बात कही तो एनडीपीएस के उक्त मुकदमे में उसे बेवजह गिरफ्तार कर लिया गया। स्वर्ण सिंह ने बताया कि जब वह जमानत पर बाहर आया तो उसने उक्त मामले की जांच के लिए अनेक उच्चाधिकारियों व गृहमंत्री तक शिकायतें दी। जिसके बाद तत्कालीन डीएसपी कालांवाली सहित अनेक पुलिस अधिकारियों द्वारा मामले की जांच भी की गई, लेकिन आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
इस्तगासे के आधार पर हुई कार्रवाई
इस मामले में स्वर्ण सिंह ने न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ इस्तगासा दायर किया। जिसके करीब 4 वर्ष बाद न्यायालय ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए आरोपी पुलिसकर्मी तत्कालीन बडागुढ़ा थाना प्रभारी मनदीप सिंह, सीआईए स्टाफ से हेड कांस्टेबल राजेन्द्र सिंह, दीपक गांधी व निरीक्षक सतबीर सिंह, एएसआई मदन लाल, एएसआई सत्यवान सहित 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ भादसं की धारा 387, 427, 452 व भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत केस दर्ज करने के लिए बडागुढ़ा पुलिस को आदेश दिए है। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया।
न्यायालय के आदेश पर 6 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इस मामले में डीएसपी ही आगामी कार्रवाई करेंगे।
- अशोक कुमार, थाना प्रभारी (बडागुढ़ा)।