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थम नहीं रहा नहरी पानी चोरी का सिलसिला

Tue, 15 Dec 2015 12:18 AM IST
अमर उजाला सिरसा/ब्यूरो
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फसलों की सिंचाई के लिए किसानों द्वारा नहरी पानी की चोरी धड़ल्ले से की जा रही है। इसमें चौपटा और ऐलनाबाद खंड सबसे आगे हैं। इस साल में नहराना मंडल की ओर से 311 किसानों के खिलाफ पानी चोरी के मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है। इसके अलावा इससे कई गुना अधिक मामले विभाग के संज्ञान में ही नहीं आए। अब गेहूं में सिंचाई का सिलसिला शुरू हो गया है ऐसे में पानी की चोरी बढ़ने की संभावना अधिक हो गई है।
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 ठंड के दिनों में किसानों को रात के समय छापामारी का भय भी कम होता है। ऐसे में जो किसान बारी के जरिए नहर के पानी से सिंचाई करते हैं उनको खामियाजा उठाना पड़ता है। सिंचाई विभाग के आगे कर्मचारियों की कमी भी आड़े आ रही है। सभी नहरों पर हर रोज कर्मचारियों की गश्त नहीं हो पानी इस लिए किसान सरेआम नहरी पानी की चोरी करने से गुरेज नहीं करते।



बात करें चोपटा और ऐलनाबाद खंड में चोरी के मामले सबसे अधिक प्रकाश में आए हैं। इस वर्ष में अब तक विभाग 311 चोरी के मामलों में किसानों के खिलाफ कार्रवाई की है। इस संख्या से अंदाजा लगाया जा सकता है कि यहां के पानी की चोरी करने वाले किसान दूसरे किसानों के हकों पर डाका डालने में गुरेज नहीं कर रहे हैं। अब गेहूं व सरसों की फसलों में सिंचाई का सिलसिला शुरू होने वाला ऐसे में पानी की चोरी फिर से बढ़ेगी। चोरी पर पूरी तरह अंकुश लगाने में विभाग के पास कर्मचारी पर्याप्त नहीं हैं। हर इकाई में कर्मचारियों का टोटा है। नहराना मंडल के कार्यकारी अभियंता वीके जग्गा ने बताया कि चोरी रोकने के लिए विभाग के कर्मचारियों के अलावा पुलिस कर्मियों की सहायता भी ली जाती है। विभाग की मुस्तैदी के कारण ही इतने मामलों में कार्रवाई हो सकी है। उन्होंने बताया कि चोरी पकड़े जाने पर आबियाने का 15 गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है। पकड़े गए किसानों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। उन्होंने बताया कि जब पानी की मांग बढ़ जाती है तो दिन और रात के समय में कर्मचारियों की गश्त बढ़ा दी जाती है ताकि चोरी न हो सके। सिरसा मंडल के कार्यकारी अभियंता बंसीलाल कटारिया ने बताया कि चोरी रोकने के लिए कर्मचारियों की मुस्तैदी की जाती है। इसके अलावा मोगे तोडने पर भी कार्रवाई की जाती है।
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हाल ही में दो-तीन ऐसे मामले प्रकाश में आए हैं जिन पर कार्रवाई की जा रही है। जांच के बाद पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी। उन्होंने बताया कि चोरी रोकने में किसानों को भी सहयोग देना होगा। कहीं भी नहरी पानी की चोरी देखे तो किसान इसकी सूचना तुरंत प्रभाव से विभाग को दें ताकि चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके। चोरी मामलों में कार्रवाई जारी है। जिनकी चोरी पकड़ी गई है उनके खिलाफ अब विभाग के एक्ट के तहत जुर्माना लगाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। ठंड के मौसम में भी कर्मचारी डे-नाइट ड्यूटी पर रहेंगे ताकि चोरी न हो सके। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सेंक्शन पदों में से आधे से अधिक पद रिक्त पड़े हैं जिस कारण विभाग द्वारा पानी चोरों पर पूरी तरह से नकेल नहीं कसी जा पा रही है।

मम्मड माइनर का पानी पहुंचाया अंतिम छोर तक
सिरसा डिविजन के कार्यकारी अभियंता बंसीलाल कटारिया ने कहा कि नहर की सफाई करवाने के बाद और मरम्मत करवाने के बाद अब नथौर, मम्मड़, दारेवाला आदि गांवों तक पानी पहुंच गया है। इससे पूर्व इन गांवों में पीने तक का पानी नहीं जा रहा था। विभाग द्वारा मम्मड़ खेड़ा डिस्ट्रीब्यूटरी के मोगों की भी जांच की जा रही है यदि कहीं मोगे के साथ छेड़छाड़ का मामला सामने आया तो कार्रवाई की जाएगी। इससे अंतिम छोर के किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मुहैया होने लगेगा।


पानी चोरी से बढ़ रहे झगडे़
चोपटा क्षेत्र में पानी की चोरी झगड़ों का सबब बनती जा रही है आए दिन पानी चोरी करने वाले और चोरी रोकने वालों के बीच विवाद होते रहते है। अनेक गांव के किसान आए दिन उपायुक्त कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करते है। उपायुक्त उन्हें नहरी विभाग के अधिकारियों के पास भेज देते है बावजूद इसके पानी चोरी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। पानी चोरी करने वाले ज्यादातर दबंग है जिन पर हाथ डालने से कर्मचारी और अधिकारी गुरेज करते है।
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