सिरसा। भारतीय किसान एकता (बीकेई) के प्रदेश अध्यक्ष लखविंदर सिंह औलख के नेतृत्व में टीम ने लोक निर्माण विश्राम गृह में केंद्रीय राज्यमंत्री सतीश चंद्र दुबे को बाढ़ की आपदा की भरपाई के लिए ज्ञापन सौंपा।
औलख ने बताया कि बाढ़, भारी बरसात व जलभराव से किसानों की खराब हुई खरीफ की फसलें (नरमा, कपास, ग्वार, मूंगफली, मूंग आदि) नष्ट हो गई हैं। इनका 50,000 रुपये प्रति एकड़ व खेत मजदूरों को 10,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए। मुआवजे में 5 एकड़ वाली शर्त हटाकर किसानों को उनकी पूरी फसल का मुआवजा दिया जाए।
औलख ने कहा कि बागवानी व सब्जियों वाले किसानों के नुकसान की भरपाई करवाई जाए। बाढ़ व नदियों, नालों के टूटने से किसानों व मजदूरों के खेतों में बनीं ढाणियां, ट्यूबवेल, सोलर पैनल, पशुओं के नोहरे भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। उनका भी मुआवजा दिया जाए।
औलख ने कहा कि घग्गर नदी की सफाई व तटबंधों को मजबूत करने, नहरों, नदियों, नालों व ड्रेनों की साफ-सफाई के लिए हरियाणा सरकार कागज में हर साल करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन, धरातल पर काम नहीं होता है। पंचकूला से लेकर राजस्थान तक घग्गर नदी की खोदाई करवाई जाए, तटबंधों को मजबूत करके दोनों साइड पक्की सड़कें बनाई जाएं। ताकि, हर साल आने वाली बाढ़ से बचा जा सके। ओटू झील की खोदाई करवाई जाए। ताकि, सिंचाई के लिए पानी भंडारण करके जरूरत अनुसार नहरों में छोड़ जा सके।
औलख ने कहा कि हिसार घग्गर सेमनाला से बरसात के मौसम में हिसार, फतेहाबाद और सिरसा जिले में हजारों एकड़ फसलें डूब जाती हैं। इससे चौपटा क्षेत्र में सेम की समस्या बढ़ती जा रही हैं। सेम प्रभावित क्षेत्र का भी स्थायी समाधान करने आदि मांगें रखीं। इस मौके पर बीकेई प्रदेश महासचिव अंग्रेज सिंह कोटली, प्रदेश उपाध्यक्ष गुरपिंदर सिंह काहलों मौजूद रहे।