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Sirsa News: बिश्नोई धर्म स्थापना दिवस पर 2 नवंबर को धर्मशाला में होंगे धार्मिक कार्यक्रम

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- सूर्योदय पर हवन यज्ञ, पाहल वितरण और लंगर का होगा आयोजन
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संवाद न्यूज एजेंसी

डबवाली।
बिश्नोई धर्मशाला में 2 नवंबर को बिश्नोई धर्म स्थापना दिवस मनाया जाएगा। इस मौके पर हवन यज्ञ, पाहल वितरण और गुरु के अटूट लंगर सहित धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। धर्मशाला में सुबह पुजारी श्रीराम हवन यज्ञ करवाएंगे।
सभा सचिव इंद्रजीत बिश्नोई ने बताया कि बिश्नोई धर्म की स्थापना बीकानेर जिले के नोखा के निकट समराथल धोरा पर गुरु जम्भेश्वर भगवान ने की थी। उस समय समाज में फैली कुरीतियों और जीव-जंतुओं व पेड़ों को नुकसान पहुंचाने जैसी प्रवृत्तियों को देखते हुए उन्होंने अनुयायियों को 29 नियमों की आचार संहिता दी। इन नियमों में जीवों पर दया, प्रकृति संरक्षण, सदाचार और आपसी प्रेम को विशेष महत्व दिया गया है।
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उन्होंने बताया कि गुरु जम्भेश्वर के बताए 29 नियम धार्मिक आस्था के साथ-साथ अनुशासित और परोपकारी जीवन जीने की सीख भी देते हैं। धर्म की स्थापना के समय विभिन्न जातियों के लोगों ने इसे अपनाया। वर्तमान में बिश्नोई समाज के लोग राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों और महानगरों में रहते हैं। विदेशों में भी समाज के लोग अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का पालन कर रहे हैं।
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