सीडीएलयू के लॉ विभाग के कोर्स की अस्थाई मान्यता को लेकर बार कौंसिल ऑफ इंडिया की एक टीम ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय का निरीक्षण किया। टीम ने तीन घंटे तक लीगल एंड क्लीनिक, मूट कोर्ट, लाइब्रेरी की विजिट की। टीम ने लीगल एंड क्लीनिक और मूट कोर्ट को देखकर संतुष्टि जाहिर की। लेकिन टीम ने लाइब्रेरी की विजिट में बेयर एक्ट और सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट 2019 की किताबें न होने पर इसे कमियां बताया। टीम अब मान्यता को लेकर अपनी रिपोर्ट बार कौंसिल ऑफ इंडिया की लीगल एजूकेशन कमेटी को सौंपेंगी। वहीं टीम ने शहर के हंसराज लॉ कॉलेज में भी मान्यता को लेकर इंस्पेक्शन की।
सीडीएलयू में 2004 से लॉ के तीन वर्षीय, पांच वर्षीय, एलएलएम, पीएचडी कोर्स चल रहे हैं। लेकिन इन कोर्स को तीन साल की अस्थाई मान्यता मिलती है। बार कौंसिल ऑफ इंडिया की टीम ने पिछली बार 2016 में विजिट की थी तब सीडीएलयू को तीन साल की अस्थाई मान्यता दी थी। यह अस्थाई मान्यता 2014 से लेकर 2017 तक थी। इसके बाद सीडीएलयू ने दोबारा तीन साल के लिए अस्थाई मान्यता के लिए आवेदन किया था। शुक्रवार को बार कौंसिल ऑफ इंडिया की टीम झारखंड के रिटायर्ड चीफ जस्टिस वीरेंद्र सिंह की अध्यक्षता में आई। इस टीम में राजीव गांधी लॉ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर पीएस जासवाल, बीसीआई मेंबर दलीप के पटेल, प्रताप सिंह, राजीव कुमार, मनोज केएन शामिल थे। टीम करीब 12 बजे लॉ भवन में पहुंची, लॉ विभाग के एचओडी प्रो. जेएस जाखड, प्रो. अशोक मक्कड़, परीक्षा नियंत्रक प्रो. सुलतान सिंह, प्रो. एसके गहलावत, प्रो. विक्रम सिंह, प्रो. मुकेश गर्ग ने उनका स्वागत किया।
रिटायर्ड चीफ जस्टिस ने पूछा हॉस्टल में दाल अच्छी बनती है या नहीं
रिटायर्ड चीफ जस्टिस ने लॉ भवन में प्रवेश करते की कहा कि उन्हें सबसे पहले लीगल एंड क्लीनिक दिखाया जाए। रिटायर्ड जस्टिस ने फैकल्टी से पूछा कि कितने विद्यार्थी पैरालीगल वालंटियर बनाए हैं। वे कभी जेल में विजिट करने गए हैं, जेल के अंदर नाटक किए हैं और नाटक का टाइटल क्या है। फैकल्टी ने जवाब दिया कि नाटक नशे पर है, लेकिन नाम नहीं बता पाए। नाटक में घर बर्बाद, परिवार का दुखी होना चित्रण करो। टीम ने मूक कोर्ट का निरीक्षण किया। टीम ने छात्रों से सवाल पूछ कि आपके प्रोफेसर ठीक से पढ़ा रहे हैं। छात्रों ने हां में उत्तर दिया। तो टीम ने कमियां पूछी, किसी ने कमी नहीं बताई। तब टीम ने कहा कि लॉ विभाग को राजीव गांधी लॉ विश्वविद्यालय कैसे बनाया जा, सुझाव दें। कोई नहीं बोला। छात्रों से रेगुलर टीचर की नियुक्ति, हॉस्टल फैसल्टी पर पूछा। इतना ही नहीं छात्राओं से पूछा हॉस्टल में दाल अच्छी बनती है या नहीं?। बचा हुआ खाना कहां लेकर जाते हो। तो छात्राओं ने कहा कि नजदीक ही ट्रस्ट है, वहां पर देकर आते हैं।
तीन दिन में सीनियर छात्र नए छात्र को कैसे बिगाड़ सकता है, बात जची नहीं
रिटायर्ड चीफ जस्टिस ने छात्रों से पूछा कि उनके नाटक का विषय क्या है। चार में से एक छात्रा ने कहा कि एक नए स्टूडेंट्स को सीनियर छात्र नशे का आदी बना देते हैं। जस्टिस ने पूछा कि वह छात्र अपने सीनियर की शिकायत क्यों नहीं करा। यदि सीनियर छात्र बिगड़े हुए है तो कॉलेज ने उन पर एक्शन क्यों नहीं लिया। एक नया छात्र तीन दिन में कैसे बिगड़ जाएगा। यह बात जची नहीं। टीम ने छात्रों को नाटक में नशे से घर बर्बाद होने पर होने वाले प्रभाव का चित्रण करने के सुझाव दिए।
जिस सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट पर पूरा देश जल रहा है, वह आपके पास नहीं
टीम ने मूक कोर्ट के बाद लॉ विभाग की लाइब्रेरी का इंस्पेक्शन किया। टीम ने पिछले तीन सालों की 2017 से 2020 तक किताबों की खरीद का रिकॉर्ड खंगाला। पुस्तकों की खरीद पर संतुष्टि जाहिर की। टीम ने लाइब्रेरियन से संविधान के नए अंक की मांग की, साथ ही बेयर एक्टर का नया अंक मांगा। लेकिन लाइब्रेरी में बेयर अंक नहीं मिला। लॉ विभाग की लाइब्रेरी में स्थाई लाइब्रेरियन और डिप्टी लाइब्रेरियन भी नहीं मिले। स्टोर का काम देखने वाला ही कामकाज संभाल रहे थे। टीम ने 2019 में सुप्रीम कोर्ट के केसों के विवरण की मांग की। टीम ने कहा कि लाइब्रेरी में यदि छात्र एक केस ढूंढने आए तो उसे सात केस और मिलने चाहिए, ताकि वह उन्हें भी पढ़े। लाइब्रेरियन ने कहा कि 2011 से लेकर 2019 तक के सुप्रीम कोर्ट के केस निर्णय की पुस्तकें बाइंडिंग के लिए भेजी गईं हैं। वे केंद्रीय लाइब्रेरी में पड़ी हैं। लेकिन टीम लाइब्रेरियन के जवाबों से संतुष्ट नहीं हुई। टीम ने कहा कि आपने किताबें बाइडिंग के उद्देश्य के लिए केंद्रीय लाइब्रेरी में भेजी, ये बात विश्वविद्यालय को लिखी? आप बताए कि 2019 में सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट के नए वर्जन आए हैं। पूरा देश जिस एक्ट पर जल रहा है, उसका विवरण आपकी लाइब्रेरी में नहीं है। छात्रों को इसे पढ़ना चाहिए। लाइब्रेरियन ने कहा कि उनके पास सभी नई किताबें हैं, हम आपको केंद्रीय लाइब्रेरी में ले जाकर दिखा सकते हैं। लेकिन टीम ने उधर जाने से इंकार कर दिया।
टीम ने इंस्पेक्शन की, लीगल एंड क्लीनिक, मूट कोर्ट की प्रशंसा की। लाइब्रेरी में कुछ पुस्तकें बाइडिंग के लिए भेजी हुईं थी। इंस्पेक्शन की रिपोर्ट टीम बार कौंसिल ऑफ इंडिया की लीगल एजूकेशन कमेटी के समक्ष रखेगी। हमने तीन साल की अस्थाई मान्यता के लिए आवेदन किया हुआ है।
-प्रोफेसर जेएस जाखड़, चेयरमैन, लॉ विभाग
सीडीएलयू के लॉ भवन में फैकल्टी के साथ बार कौंसिल ऑफ इंडिया की टीम।- फोटो : Sirsa