चोपटा। नाथूसरी चोपटा क्षेत्र से गुजरने वाली बरुवाली नहर में वीरवार रात को सिरसा भादरा रोड पर बने पुल के पास 50 फीट चौड़ी दरार आ गई। इससे आसपास की करीब 60 एकड़ फसल जलमग्न हो गई और सौर ऊर्जा आधारित नलकूपों में भी पानी भर गया।
इस कारण 12 गांवों के किसान सिंचाई से वंचित रह जाएंगे। सूचना मिलने पर सिंचाई विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और नहर को नहराणा हेड से बंद करवा कर दरार को पाटने का काम शुरू किया। कर्मचारियों का कहना है कि सेह नामक जंगली जानवर नहर के नीचे से मिट्टी निकाल देता है, जिसके चलते पानी का रिसाव शुरू हो जाता है और नहर में दरार आ जाती है।
किसान हनुमान सिंह, महेंद्र सिंह रोहतास का कहना है कि यह नहर यहां से तीसरी बार टूटी है। इसके बाद भी विभाग के अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।
किसानों ने बताया कि उन्होंने खेत में गेहूं व सरसों की फसल की बिजाई कर रखी थी। अब अचानक नहर टूटने से फसल पूरी तरह से जलमग्न हो गई है। यह फसल तो अब बर्बाद हो गई है, लेकिन अब जब तक पानी नहीं सूखेगा तब तक दोबारा बिजाई भी नहीं
कर सकते। किसानों का कहना है कि बार-बार नहर टूटने के कारण फसलों के उत्पादन पर भी विपरीत असर पड़ता है। विभाग को इस पर संज्ञान लेते हुए उन्हें मुआवजा देने चाहिए और नहर की मरम्मत करवानी चाहिए। बार-बार नहर टूटने से किसानों को नुकसान हो रहा है।
12 से अधिक गांवों में नहीं लग पाएगा पानी
बरुवाली नहर से माखोसरानी, दड़बा कलां, रुपाणा खुर्द, लुदेसर, रूपावास, ढुकड़ा, गुड़ियाखेड़ा, जमाल सहित कई गांवों के खेतों में सिंचाई का पानी जाता है। अब नहर टूटने से इन गांवों के किसानों की बारी नहीं लग पाई। किसान वेदपाल, राजाराम, सतपाल, रोहतास, राकेश कुमार का कहना है कि जब भी सिंचाई की पानी की बारी आती है, तो पीछे नहर टूट जाती है। नहर टूटने के कारण पानी बंद कर दिया जाता है। इस दौरान जिन किसानों के खेतों में सिंचाई के पानी की बारी होती है। उनके खेत सूखे ही रह जाते हैं। अभी तीन दिन तक सिंचाई पानी पूरी तरह बाधित हो गया है।
रात को बरुवाली नहर टूटने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। नहर को नेहराणा हेड से बंद करवाया दिया गया है। नहर के टूटने का सबसे बड़ा कारण यहां सेह नामक जंगली जानवर है। यह नहर के नीचे से मिट्टी निकाल देता है। इसके कारण पानी का दबाव होते ही नहर टूट जाती है। इसके अलावा नहर के नजदीक खड़े वन विभाग के पेड़ों की जड़ों से भी नहर की पटरी उखड़ जाती है। इसकेेे बाद पानी रिसने से नहर टूट जाती है।
-विकास हंस जेई सिंचाई विभाग