जिला बार एसोसिएशन का चुनाव बेहद कांटेदार रहा। इस बार के चुनाव में पहली बार कई इतिहास रचे गए। पहली बार ऐसा हुआ की प्रधान और सचिव पद पर लगातार पहले प्रत्याशी ने ही जीत दर्ज की। प्रधान पद पर एडवोकेट जीपीएस किंगरा व सचिव पद पर अमित गोयल ने दूसरी बार जीत हासिल की। उपप्रधान पद एडवोकेट भूपेंद्र खट्टर ने जीत और संयुक्त सचिव पद पर महिला अधिवक्ता अमनदीप कौर ने विजय प्राप्त की। सबसे ज्यादा कड़ा मुकाबला प्रधान पद पर देखने को मिला। शुरू से ही इस प्रकार का मुकाबला होने की उम्मीद थी। इस पद पर अधिवक्ता जीपीएस किंगरा, एडवोकेट जयदीप गर्ग, संजय गोयल व रणबीर सिंह जम्मू के बीच टक्कर थी।
व्यक्तिगत संपर्क के अलावा सभी प्रत्याशियों ने जाति आधार पर वोट मांगे। इस कारण चारों उम्मीदवार के बीच कड़ा मुकाबला हो गया था। वीरवार शाम 5:45 बजे प्रधान पद का परिणाम घोषित होने लगा तो बार रूम में वकीलों की धड़कने बढ़ने लगी। चुनाव अधिकारी ने माइक हाथ में लेकर कहा कि कड़े मुकाबले में जीपीएस किंगरा ने दो वोट से जीत हासिल करते हुए एडवोकेट जयदीप गर्ग को हराया है। संजय गोयल को 131 वोट और एडवोकेट रणबीर सिंह जम्मू को 800 में से मात्र 57 वोट मिले। जीपीएस किंगरा की जीत के बाद उनके समर्थक वकील झूम उठे और टेबल पर चढक़र भांगड़ा करने लगे। सचिव पद पर एडवोकेट अमित गोयल ने एडवोकेट गणेश सेठी को 44 वोटों से पराजित किया। अमित गोयल को 422 वोट व गणेश सेठी को 373 वोट मिले। उप प्रधान पद भूपेंद्र खट्टर ने जीता और संयुक्त सचिव पद एडवोकेट अमनदीप कौर के खाते में गया। अमनदीप कौर ने एडवोकेट मंजू बाला को 162 वोटों से हराया।
पहली बार ईवीएम से हुआ मतदान
बार एसोसिएशन चुनाव में पहली दफा ईवीएम का इस्तेमाल किया गया। इसके अलावा पहली बार ही चुनाव में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। मतदान शुरू होने के साथ ही सभी प्रत्याशी लाइब्रेरी रूम के बाहर खड़े हो गए। जो भी एडवोकेट वोट डालने जाता प्रत्याशी हाथ जोडक़र अपने पक्ष में वोट डालने की अपील करते दिखे। हमेशा से ही बार चुनाव में एक घंटे का लंच टाइम रखा जाता है लेकिन इस बार लंच भी नहीं रखा गया। साढ़े नौ बजे से लेकर शाम पांच बजे तक मतदान प्रक्रिया चली। चुनाव अधिकारियों ने जिस भी पद का परिणाम घोषित किया पहले उस पद के प्रत्याशियों को परिणाम दिखाया गया।
संयुक्त सचिव पर नोटा का ज्यादा प्रयोग
चुनाव में नोटा का इस्तेमाल भी हुआ। कुल 879 वोटों में से 802 मतदाताओं ने अपने अधिकार का प्रयोग किया। संयुक्त सचिव के पर पर 802 वोटों में से 10 वोट नोटा को मिले। सचिव पद पर नोटा के खाते में दो वोट, उपाध्यक्ष चुनाव में नोटा को चार वोट व प्रधान पद पर दो मतदाताओं ने किसी भी प्रत्याशी को सही न मानते हुए नोटा का बटन दबाया। सभी पदों के लिए 18 मतदाताओं ने नोटा दबाना बेहतर समझा।
जीत के बाद समर्थकों ने किया भंगड़ा
जैसे-जैसे चुनाव परिणाम आता गया विजेता उम्मीदवार के समर्थक लड्डू बांटने और भंगड़ा डालने लगे। जीत के नशे में समर्थक टेबलों पर चढक़र नाचे। प्रधान पद पर एडवोकेट जीपीएस किंगरा का दोबारा चुनाव जीतने का मुख्य कारण उनके द्वारा सालों से लंबित चैंबर निर्माण की मांग को पूरा करना रहा। सात साल से वकील चैंबरों की समस्या से परेशान थे। हाईकोर्ट से निर्माण की मंजूरी मिलने के बाद भी किसी ने निर्माण कार्य शुरू करवाने की पहल नहीं की। वर्ष 2015 में बार प्रधान बनने के बाद जीपीएस किंगरा ने चैंबरों का निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जो अभी चरम पर है। इस काम के चलते जीपीएस किंगरा व सचिव अमित गोयल को मतदाताओं ने फिर से मौका दिया। जीत के बाद दोनों विजेताओं ने मंच पर खड़े होकर मतदाताओं का आभार जताया और भरोसा दिलाया कि उम्मीदों पर पूरा खरा उतरेंगे।