संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नगर परिषद और पालिकाओं में भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए गठित उड़नदस्ता टीमें कागजों में दबकर रह गईं। मई 2023 में सरकार ने अतिरिक्त निगम आयुक्त से लेकर संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारियों को अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारियां सौंपी थी। डेढ़ साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी यह फ्लाइंग स्क्वाड कागजों से बाहर नहीं आ सका है। यही नहीं, इन अधिकारियों की सूची को नगर परिषद, पालिकाओं के नोटिस बोर्ड या साइट पर भी जारी नहीं की जा सकी है। ऐसे में 90 प्रतिशत लोगों को जानकारी ही नहीं है कि कोई फ्लाइंग स्क्वाड भी नगर परिषद की गड़बड़ियों की जांच के लिए नियुक्त किया हुआ है।
सिरसा फ्लाइंग स्क्वाड के लिए हिसार नगर निगम के एएमसी को इंचार्ज बनाया गया था। नगर परिषद सिरसा में विज्ञापन साइटों से लेकर सड़कों के निर्माण कार्य तक में भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं, लेकिन आज तक फ्लाइंग स्क्वाड के अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। गलत तरीके से लगाए गए 20 साल के होर्डिंग व बस क्यू शेल्टर के टेंडर की जांच स्वयं एसीएस कर रहे हैं। ऐसे में फ्लाइंग स्क्वाड का गठन हवा-हवाई ही साबित हो रहा है।
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इन शिकायतों का करना था निपटान
- विकास कार्यों की शिकायतें
- अवैध होर्डिंग लगाने
- अवैध से चल रहे भवन निर्माण
- अवैध रूप से कॉलोनियों के निर्माण
- स्वामित्व स्कीम के तहत दी जाने वाली दुकानों
- प्रॉपर्टी टैक्स
- भ्रष्टाचार को लेकर आने वाली अन्य शिकायतें
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साइट से बाहर नहीं आए आदेश
वार्ड नंबर 19 की निवर्तमान पार्षद नीतू सोनी का कहना है कि फ्लाइंग स्क्वाड के लिए जारी किए गए आदेश सरकारी कार्यालयों में कहीं नजर नहीं आते हैं। स्थानीय नगर परिषद की साइटों पर यह आदेश अपलोड ही नहीं किए गए जिससे किसी को जानकारी मिल सके कि सरकार ने कोई फ्लाइंग स्क्वाड अधिकारी भी नियुक्त किए हैं।
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इन मामलों में हो चुकी है शिकायत
- 10 करोड़ के टेंडर बिना अनुमति दूसरी एजेंसी को देने का मामला ।
- ऑटो मार्केट में सड़क निर्माण में घटिया सामग्री इस्तेमाल होने की जांच।
- बरसाती लाइन बिछाने में भ्रष्टाचार।
- शहर की कॉलोनियों में सड़क निर्माण का कार्य में धांधली
- प्रॉपर्टी टैक्स में भ्रष्टाचार का मामला
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करीब दो साल पहले मुझे यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। भ्रष्टाचार का कोई केस सामने आने के बाद मुख्यालय की ओर से जांच का कोई आदेश मिला होता तो मैं जरूर जांच करता। अभी तक मेरे पास इस तरह का कोई आदेश नहीं आया है। वहीं अब मुख्यालय स्तर पर ही चीफ विजिलेंस ऑफिसर की तैनाती कर दी गई है। भ्रष्टाचार के मामलों में अब यही जांच करते हैं।
डाॅ. प्रदीप हुड्डा, अतिरिक्त निगमायुक्त, हिसार।