चोपटा। चोपटा क्षेत्र से गुजरने वाली बरुवाली नहर सोमवार को गांव ढूकड़ा के पास अचानक टूट गई। नहर में करीब 30 फीट चौड़ी दरार आ गई है। इससे आस पास के खेतों में पानी फैल गया और दर्जन भर गांवों के किसान सिंचाई से वंचित रह गए। वहीं, 2 महीने से पेयजल की किल्लत झेल रहे ग्रामीणों को कोई राहत नहीं मिली। अब नहर को पीछे से बंद करवाया जाएगा और फिर पटरी को बांधा जाएगा। इसमें भी करीब तीन से चार दिन का समय लग जाएगा।
कालू लूना, मांगेराम बीरडा, कालू राम ढाका, गुलजारी कुम्हार, मोमन राम, भाल सिंह, शुभकरण छींपा, राजेंद्र, ओमप्रकाश सुथार सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि बरुवाली नहर से जमाल, कुतियाना, बरासरी, रायपुर, रूपावास, ढूकड़ा, गुड़िया खेड़ा सहित कई गांवों में सिंचाई के साथ-साथ पेयजल की व्यवस्था भी इसी नहर के पानी से होती है। सोमवार सुबह ही नहर में पानी आया था और दोपहर को अचानक नहर टूट गई। जिससे सिंचाई व्यवस्था तो दूर अब पेयजल की व्यवस्था भी नहीं हो सकेगी। बता दें कि ग्रामीण करीब दो महीने से पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि गांव की डिग्गियां खाली पड़ी हैं। ग्रामीण नहर में पानी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन नहर में पानी आते ही यह टूट गई। ग्रामीणों का कहना है कि नहर टूटने की सूचना सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दे दी गई है।
नरमे की बिजाई भी अटकी
माखोसरानी, दड़बा कलां व रुपाणा खुर्द गांव के खेतों में नहरी पानी से सिंचाई की जाती है। अब नहर टूटने से इन गांवों के पानी की बारी वाले किसानों के खेत बिना सिंचाई के ही रह गए हैं। किसान वेदपाल, राजाराम, सतपाल, रोहतास, राकेश कुमार, का कहना है कि जब भी नहर से सिंचाई की बारी आती है तो नहर टूट जाती है। नहर टूटने के बाद पीछे से नहर को बंद करवाया जाता है और फिर नहर की पटरी को बांधकर पानी छोड़ा जाता है। इस दौरान जिन किसानों के खेतों में सिंचाई के पानी की बारी होती है। वह खेत सूखे ही रह जाते हैं। अभी तीन दिन तक सिंचाई पानी पूरी तरह बाधित हो गया है। अब नरमे की बिजाई भी मुश्किल हो गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है।