सिरसा। जिले में सरसों की फसल की कटाई के साथ ही मंडियों में सरसों की फसल की आवक शुरू हो गई है। मंडी में सरसों की सरकारी खरीद न होने के कारण किसान सरसों की फसल को निजी संस्थानों पर कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर हैं। सरसों की सरकारी खरीद के लिए सरकार की ओर से हैफेड के पास कोई औपचारिक पत्र नहीं पहुंचा है।
जिलेभर में सरसों की फसल की कटाई के साथ ही फसल बेचने के लिए किसान मंडियों में पहुंचने लगे हैं। वहीं मंडी में सरसों की फसल की खरीद के लिए सरकार ने कोई तैयारी नहीं की है क्योंकि जहां किसान फसल को लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं। वहीं सरकार की ओर से सरसों की फसल के लिए कोई भी पत्र जारी नहीं किया गया है। इस कारण किसान सरसों की फसल निजी केंद्रों पर कम दाम पर बेचने के लिए मजबूर हैं।
5,225 रुपये क्विंटल बिक रही सरसों की फसल
जिससे किसानों को सरसों की फसल 4,600 से लेकर 5,225 रुपये क्विंटल के हिसाब से बेच रहे हैं। सरकार ने सरसों की फसल खरीदने के लिए एमएसपी निर्धारित की है लेकिन सरकारी खरीद शुरू न होने के कारण किसानों को प्रति क्विंटल भारी चपत लग रही है। बीते वर्ष 15 मार्च से ही सरकारी केंद्रों पर सरसों की फसल की खरीद शुरू हो गई थी। इससे किसानों की फसल का सही समर्थन मूल्य पर खरीद हुई थी लेकिन बुधवार शाम तक भी हैफेड के पास सरकारी खरीद के लिए कोई पत्र नहीं आया। इस कारण किसानों को करीब एक सप्ताह तक और इंतजार करना पड़ सकता है। हैफेड के पास पत्र आने के बाद ही सरसों की फसल समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी।
सरसाें की फसल की आवक मंडी में हो गई है। रोजाना 100 क्विंटल के करीब सरसों की फसल शहर की मंडी में आ रहे हैं। किसानों की फसल की सरकारी खरीद न होने के कारण किसानों को भारी चपत लग रही है। सरकार को समर्थन मूल्य पर किसानों की फसल खरीदनी चाहिए। ताकि किसानों को किसी भी प्रकार का कोई नुकसान न हो।
- मनोहर मेहता, मंडी प्रधान।