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Sirsa News: निजी डाटा के दुरुपयोग की आशंका से अभिभावक नहीं दे रहे सहमति, स्कूलों में बच्चों की नहीं बन पा रही अपार आईडी

Sun, 27 Oct 2024 02:05 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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अनुपमा जाखड़
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सिरसा। हाल ही में प्रदेश सरकार ने निजी और राजकीय स्कूलों में वन टाइम ऑटोमेटिड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री (अपार आईडी) बनाने के निर्देश जारी किए हैं। सरकार के आदेश के बाद जिले में अपार आईडी बनाने का कार्य शुरू किया गया। इसके बावजूद जिले के कुल 2,23,278 विद्यार्थियों में से मात्र 137 विद्यार्थियों की ही आईडी बनाई जा सकी है। स्कूल संचालकों के मुताबिक डाटा के दुरुपयोग की आशंका के कारण कई अभिभावक इसकी सहमति नहीं दे रहे हैं।
सरकार नई शिक्षा नीति के तहत इस आईडी को बना रही है। जिसे देशभर में लागू किया जाना है। प्रदेश में भी इस योजना की शुरुआत की गई है। इस आईडी को एक राष्ट्र एक पहचान का भी नाम दिया गया है। इसके बावजूद प्रदेश के अधिकतर जिलों में इस योजना को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। इसे गंभीरता से न लेने का मुख्य कारण अभिभावकों की अनुमति नहीं मिलना है, क्योंकि इस आईडी को बनाने के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी है। अभिभावक आईडी न बनाने के पीछे कई कारण बतर रहे हैं।
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जानिये... क्या है अपार आईडी
अपार आईडी विद्यार्थियों की एक ऐसी आईडी है, जिसमें बच्चों के नाम से लेकर उनके अभिभावकों तक की जानकारी होगी। इस आईडी को डिजिटल लॉकर से जोड़ा किया जाएगा। इसमें बच्चे का नाम, पता, कक्षा, रोल नंबर, उनके नंबर, डीएमसी, परीक्षा परिणाम, क्रेडिट स्काेर, अभिभावकों का नाम, कारोबार, घर का पता आदि की जानकारी दर्ज होगी। एक तरह से इसमें विद्यार्थी की हर प्रकार की निजी जानकारी होगी। ये आईडी प्री-नर्सरी से लेकर पढ़ाई के अंत तक एक ही रहेगी। ये आधार कार्ड से लिंक की जाएगी। इसकी जानकारी अपने आप बदलती रहेगी। हर बच्चे का पूरा डाटा इस आईडी में होगा।

अपार आईडी के हो सकते हैं ये लाभ
- परीक्षाओं के लिए शुल्क देने में आसानी
- विद्यार्थियों को किताबें और स्टेशनरी पर भी छूट



- मनोरंजन पार्कों और छात्रावास के लिए अनुदान
- कार्डधारक विद्यार्थियों को बस यात्रा में अनुदान
- विद्यार्थियों को सरकारी संग्रहालयों में निशुल्क प्रवेश

अभिभावकों का डर
- साइबर बुलिंग हो सकती है।
- बच्चों का डाटा गलत कंपनी के पास जा सकता है।
- डाटा लीक होने से बच्चों के साथ गलत बातचीत हो सकती है।
- बच्चों के डाटा का दुरुपयोग करके उसे ब्लैकमेल किया जा सकता है।
- आधार कार्ड का डाटा जैसे लीक हो रहा है, अपार का भी हो सकता है।
- कंपनी बच्चों के व्यवहार को देखकर उत्पाद या फिर वीडियो सोशल मीडिया कंटेंट उन्हें बेच सकते हैं।
- डाटा लीक हो गया तो बच्चे किस कक्षा में कितने नंबर लेकर आते हैं, कैसा उनका व्यवहार है, शिक्षक ने उनका क्या फीडबैक दिया है, सब आएगा, जिससे उसका विश्लेषण करके दुरुपयोग किया जा सकता है।

आधार कार्ड और अपार आईडी में है क्या फर्क
कुछ लोग अब भी इस बात से संशय में है कि आधार कार्ड और अपार आईडी एक ही पहचान है, तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आधार कार्ड हर एक नागरिक के भारत का मूल निवासी होने का प्रमाण है। जो पढ़े-लिखे और गैर-शिक्षित सभी लोगों का बन सकता है, लेकिन अपार कार्ड सिर्फ विद्यार्थियों का बनता है।

शिक्षा मंत्रालय की ये अच्छी पहल है। शिक्षा निदेशालय के निर्देशानुसार सभी स्कूल मुखियाओं और संचालकों को आईडी बनवाने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। - बूटा राम, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, सिरसा।
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जिले में अभी सिर्फ 137 विद्यार्थियों की ही आईडी ही बन पाई है। विद्यार्थियों की आईडी बनाने के लिए अभिभावकों का सहमत होना जरूरी है। जिले के अभिभावक अभी इस आईडी को बनाने की सहमति नहीं दे रहे हैं। इस कारण काम में देरी हो रही है। - नीरज मक्कड़, प्रोग्रामर, सिरसा।
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