फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अनशन खोलने से नाराज किसानों ने बैठक कर किया बहिष्कार

विज्ञापन
शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में किसानों को संबोधित करते जीपीएस किंगरे - फोटो : Sirsa
विज्ञापन
सिरसा। डिप्टी स्पीकर रणबीर गंगवा की गाड़ी पर हमला करने मामले में देशद्रोह के आरोपी पांच किसानों से धारा न हटने और जमानत की जानकारी न देने पर नाराज किसान नेताओं ने शनिवार को शहीद भगत सिंह स्टेडियम में बैठक की। किसानों ने खेल स्टेडियम में तीन घंटे बैठक की और 11 सदस्यीय कमेटी का गठन कर मामले की जानकारी संयुक्त मोर्चा के समक्ष रखने का फैसला लिया। वहीं किसानों ने दूसरे गुट के किसान नेता प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा और लखविंद्र सिंह औलख पर आंदोलन की आड़ में चेहरा चमकाने और चंदा चुराने के आरोप लगाए।
विज्ञापन

किसान नेता हरविंद्र सिंह थिंद, भूपेंद्र सिंह वैदवाला, रोशन सुचान, सिकंदर सिंह, राकेश दहिया, धर्मपाल भरोखा और अन्य गांवों के किसान शहीद भगत सिंह खेल स्टेडियम में एकत्र हुए। बैठक में बार एसोसिएशन प्रधान जीपीएस किंगरे भी किसानों को धाराओं संबंधित जानकारी देने के लिए पहुंचे। किसान नेता भूपेंद्र सिंह वैदवाला ने कहा कि रणबीर गंगवा की गाड़ी पर हमला करने मामले में पुलिस द्वारा पकड़े गए पांच किसानों को छुड़वाने और मामला रद्द करवाने के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने बलदेव सिंह सिरसा को अनशन पर बैठाया था। लेकिन किसान नेताओं ने जमानत याचिका लगाकर किसानों को जमानत दिलवा दी। जबकि न तो देशद्रोह की धारा हटाई गई और न ही मामले रद्द हुए हैं। इसके कारण वह किसान नेता लखविंद्र सिंह औलख और प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा का बहिष्कार करते हैं। वहीं किसान नेता हरविंद्र सिंह थिंद ने कहा कि अगर बिना मामला रद्द करवाए ही अनशन खोलना था तो किसानों की जमानत अनशन के बिना ही हो सकती थी। इसके लिए इतना हंगामा करने की क्या आवश्यकता थी। मुख्य मुद्दा मामले रद्द करवाना था तो बलदेव सिंह सिरसा मामले रद्द होने से पहले ही अनशन से क्यों पीछे हट गए। उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर 11 सदस्यीय कमेटी का गठन कर संयुक्त किसान मोर्चा के समक्ष रखा जाएगा। किसान नेता रोशन सुचान ने कहा कि मोर्चा लगाने के लिए किसानों की पहले बैठक हुई थी। इसके बाद जो भी फैसले लिए गए उनको जानकारी तक नहीं दी गई। दो किसान नेता ही मिलकर सभी तरह के फैसले लेते रहे, जिसका वह विरोध करते हैं।
जीपीएस किंगरे ने किसानों को समझाई पूरी प्रक्रिया
बैठक में किसानों को धाराओं के संबंधित जानकारी देने के लिए जिला बार एसोसिएशन प्रधान जीपीएस किंगरे मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि जेल से जमानत पर रिहा हुए किसानों पर अभी तक धारा नहीं हटाई गई है। जो किसान नेता देशद्रोह की धारा हटने की बात कह रहे हैं वे सब झूठे हैं। किसानों को अब अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी। किसान नेताओं ने आवेदन कर ही किसानों को जमानत दिलवाई है। उन्होंने कहा कि किसानों को अब खुद का मोर्चा बनाना चाहिए। जिस पर किसानों ने आपत्ति जताते हुए संयुक्त किसान मोर्चा के साथ जुड़े रहने का फैसला सुनाया और संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा दी जाने वाले कॉल की ही पालना करने का निर्णय लिया।
विज्ञापन

किसान नेता प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा और लखविंद्र सिंह औलख पर लगाए चंदा चोरी का आरोप
बैठक के दौरान किसान नेताओं ने प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा और लखविंद्र सिंह औलख पर चंदा चुराने और चेहरा चमकाने के भी आरोप लगाए। किसानों ने कहा कि प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा से पहले भी लोगों द्वारा दिए गए चंदे को लेकर आवाज उठाई थी, लेकिन भारूखेड़ा ने चंदे का कोई भी हिसाब नहीं दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि लखविंद्र सिंह औलख पार्टी से जुड़ा हुआ है और चेहरा चमकाने के लिए ही आंदोलन में शामिल हो रहा है। वह यह कभी नहीं होने देंगे। संयुक्त किसान मोर्चा को किसान नेताओं की हरकतों के बारे में जानकारी देंगे और पुख्ता सुबूत उनके सामने पेश किए जाएंगे।
अनशन पर बैठे बलदेव सिंह पर भी रोड जाम का मामला दर्ज
सिरसा। पांच किसानों की रिहाई के लिए लघु सचिवालय के पास वाले रोड जाम करने के आरोप में अनशनकारी बलदेव सिंह व 400 अन्य किसानों पर शुक्रवार शाम को पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। बता दें कि 17 जुलाई को एसपी कार्यालय का घेराव किया गया था। इस दौरान 17 जुलाई की शाम को ही बरनाला रोड पर बलदेव सिंह सिरसा अनशन पर बैठ गए थे। पुलिस ने 17 जुलाई से 22 जुलाई तक रोड जाम करने पर बलदेव सिंह सिरसा, लखविंद्र सिंह औलख, प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा, गुरप्रीत सिंह गिल, मैक्स साहुवाला, गुरमीत ढिल्लो, लखा सिंह अलीकां, गुरप्रेम देसूजोधा, भूपेंद्र सिंह वैदवाला, गुरप्रीत सिंह गुरी, सिकंदर सिंह रोड़ी के सहित 400 के खिलाफ भी रोड जाम का मामला दर्ज किया है। वहीं 21 जुलाई को दो घंटे नेशनल हाइवे जाम करने पर पुलिस पहले से ही 525 किसानों पर मामला दर्ज किया था। ऐसे में अब तक करीब 925 लोगों के खिलाफ रास्ता जाम करने के मामले दर्ज किए जा चुके हैं।
किसानों के हक में लिए गए फैसले सभी की सहमति के साथ ही लिए गए थे। संयुक्त किसान मोर्चा की देखरेख में ही सभी कार्य हुए हैं। भारतीय किसान एकता मंच की ओर से चंदा नहीं लिया गया। हर तरह के सवालों का जवाब संयुक्त मोर्चा को देने के लिए तैयार हैं।
विज्ञापन

-लखविंद्र सिंह औलख, किसान नेता
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें