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Sirsa News: कृषि भूमि के रास्ते पर कॉलेज के कब्जे का आरोप, प्रिंसिपल के आवास की दीवार हटाई

Thu, 30 Apr 2026 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
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सिरसा महिला कॉलेज हॉस्टल की वह दीवार, जिस हटाकर रास्ता हटाने की मांग हे।  संवाद
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- सालों पहले बना था कॉलेज, उसके बाद बनी बांसल कॉलोनी, कभी कृषि भूमि के लिए मालिकों ने छोड़ा था रास्ता, बाद में कॉलेज ने बनाई दीवार
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- सालों बाद एक इंजीनियर को आई याद, अब राजनीतिक दबाव में महिला हॉस्टल की दीवार खिसकाने का प्रयास
- प्रिंसिपल बोले-प्रांतीय सरकार की जमीन, डीसी हैं मालिक, हमें लिखकर देने की जरूरत नहीं
- बीते दिन हुई बैठक में एडीसी ने दिया है सात दिन का समय

फोटो - 23,24
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। राजकीय नेशनल कॉलेज 1957 में बनाया गया था। इसके साथ कॉलेज प्राचार्य का आवास बना। दानी सज्जन के परिवार ने यह जमीन प्रांतीय सरकार को शैक्षणिक गतिविधियां चलाने के लिए दी थी। 69 साल बाद इस जमीन के साथ काटी गई कॉलोनी ने कृषि भूमि के ढाई करम के रास्ते की मांग की। पैमाइश के बाद इस ढाई करम के रास्ते की जगह को छोड़ने के आदेश डीसी ने दिए। प्रिंसिपल ने जांच अधिकारी को लिखकर देने से इन्कार कर दिया है।

एक भाजपा नेता के लगातार दबाव बनाने के कारण मामला गरमाता जा रहा है। बुधवार को जिला नगर आयुक्त कार्यालय में हुई बैठक में कॉलेज प्रबंधन के प्रतिनिधियों को लिखकर देने के लिए फटकार लगाई गई लेकिन कॉलेज प्रिंसिपल ने इस मामले में कुछ भी लिखकर देने से साफ इन्कार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि प्रांतीय सरकार की जमीन के मालिक उपायुक्त स्वयं हैं। वह इस जमीन के मालिक नहीं है। ऐसे में कॉलेज में सालों पहले पढ़े समाजसेवियों ने प्रशासन के खिलाफ बिगुल बजा दिया है।
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समाजसेवी करतार सिंह ने नेशनल कॉलेज को कब्जाधारी बताए जाने और कॉलेज की चहारदीवारी को हटाने के आदेश को लेकर प्रदेश के मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव उच्च शिक्षा हरियाणा, महानिदेशक उच्च शिक्षा हरियाणा, आयुक्त हिसार मंडल, उपायुक्त को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच एसआईटी से करवाने की मांग की है।
यह है मामला
1957 में सिरसा के खंजानचियान परिवार ने प्रांतीय सरकार को शैक्षणिक गतिविधि के लिए जमीन दान दी थी। इसी जमीन पर प्राचार्य का कॉलेज के साथ साथ आवास बनाया गया। उस समय बांसल कॉलोनी नहीं काटी गई थी। आसपास खेत होते थे। ढाई करम का रास्ता कॉलेज को दी गई जमीन के साथ जाता था। कॉलेज में प्राचार्य का आवास बनाए जाने के दौरान यह रास्ता कॉलेज की सीमा के अंदर आ गया। पहले यह कृषि आधारित रास्ता था जो कॉलेज को दी गई थी। उस जमीन से लगता था। इसलिए इस रास्ते पर कॉलेज ने अपनी दीवार बना ली।
बाद में किसी व्यक्ति द्वारा बांसल कॉलोनी काट दी गई। 13 फीट का रास्ता छोड़ दिया गया। 69 सालों से इसी रास्ते का प्रयोग कॉलोनी के लोग कर रहे थे। वर्ष 2024 में कॉलोनी में रहने वाले एक जेई व अन्य मौअजिज लोगों ने मिलकर समस्या समाधान शिविर में ढाई करम का रास्ता दिलवाने की मांग की।
उपायुक्त शांतनु शर्मा ने तत्कालीन एडीसी को पैमाइश करवाने और मामले की जांच करने के आदेश दिए। आदेशों के आधार पर जिला नगर आयुक्त ने पैमाइश करवाई तो वह रास्ता कागज में मिला। अब कोई खेत इस रास्ते को नहीं लगते हैं। इस रास्ते की मलकियत भी पूर्व मालिकों के नाम है। उन्होंने कोई रास्ता देने की शिकायत भी अधिकारियों को नहीं दी।
बांसल कॉलोनी के लोगों के अनुसार, पैमाइश के दौरान प्राचार्य व पटवारी सभी मौजूद थे। कानूनगो की मौजूदगी में पैमाइश हुई थी। उसके बाद ढाई करम का रास्ता दिया गया है। यह रास्ता किसी खेत को लगता नहीं है और कॉलोनी के लोग इस पर दावा भी नहीं कर सकते हैं। ऐसे में जिला नगर आयुक्त के आदेशों पर कॉलेज प्रबंधन से लिखवाया गया है और बीएंडआर ने टेंडर लगाकर दीवार हटा दी।
वहीं, अब कॉलोनी के लोगों ने महिला छात्रावास की दीवार हटाने की भी गुहार लगाई और जिला नगर आयुक्त ने मौजूदा प्रिंसिपल शत्रुजीत को लिखकर देने को कहा। प्रिंसिपल ने इस मामले में लिखकर देने से इन्कार कर दिया है। इसी से नाराज अधिकारियों ने उन्हें सात दिनों में कार्रवाई करने के आदेश दे डाले।
यह है लोगों का कहना
बांसल कॉलोनी निवासी हनुमान गोदारा ने बताया कि उन्होंने 1995 में मकान बनाया था। इसके बाद रहने लगे थे। खजानचियान परिवार ने यह जमीन दान दी थी। यहां पर खेत होते थे और ढाई करम का रास्ता उन खेतों को जाता था। 19 जून 2024 को रास्ते को लेकर समस्या समाधान शिविर में शिकायत दी गई। उपायुक्त ने इस मामले में जिला नगर आयुक्त को जांच करने के निर्देश दिए। पूर्व प्राचार्या हरजिंद्र सिंह, पटवारी और कानूनगो की मौजूदगी में पैमाइश हुई। प्रिंसिपल ने लिखकर दिया कि यह रास्ते की जगह है। इसके बाद बीएंड ने रास्ता देकर चहारदीवारी प्रिंसिपल आवास की नई निकाली। हमारी मांग है कि 70 करम का पूरा रास्ता दिया जाए। महिला छात्रावास की दीवार तक हटाई जाएगी।
यह है मौजूदा स्थिति
- दीवार हटाने के बाद तीन से चार साल पुराने पेड़ सड़क की जगह में हैं।
- बिजली निगम ने भी अपनी जल्दबाजी दिखाते हुए बिजली के खंभे लगा दिए हैं।
- रास्ते की जगह पर इंस्टीट्यूट व स्थानीय लोगों ने पार्किंग बना ली।
- महिला छात्रावास के रास्ते तक कॉलोनी के रास्ते का आखिरी छोर है।
कोटस
कॉलेज के नाम पर जमीन नहीं है। यह प्रांतीय सरकार की जमीन है। उपायुक्त इसके मालिक हैं। उपायुक्त स्तर पर जो कार्रवाई होगी। कॉलेज को मंजूर है। लोग जहां रास्ते की मांग कर रहे हैं वह महिला हॉस्टल की जगह है।
-शत्रुजीत सिंह, प्रिंसिपल, राजकीय कॉलेज
कोट्स
मैं राजकीय कॉलेज में पढ़ा हूं। 69 साल बाद कोई आकर रास्ता मांग रहा है जबकि वह उस जगह का मालिक तक नहीं है। जिस व्यक्ति ने रास्ता छोड़ा था वह कृषि भूमि में आने-जाने के लिए था। अब जब कृषि भूमि ही कॉलेज को दे दी तो रास्ते का कोई औचित्य नहीं बनता है। इस मामले में अभी महज शिकायत की है। इसे कोर्ट में लेकर जाएंगे। कॉलेज के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा।
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-करतार सिंह, समाजसेवी व शिकायतकर्ता।
कोट्स
हमारी तो मांग है कि कॉलेज की खाली पड़ी जमीन पर पार्क बनाए जाए या फिर कोई नया इंस्टीट्यूट व अन्य गतिविधियां हों। सरकारी जगहों पर रास्ते काटकर उन्हें बर्बाद न किया जाए।
-संदीप नेहरा, कांग्रेसी नेता
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