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रिश्तों पर ग्रहण लगा रहा एड्स

Mon, 01 Dec 2014 12:32 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, सिरसा
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दंपति एचआईवी (एड्स) पॉजीटिव मिल रहे हैं, जिससे विवाह जैसे पवित्र बंधन पर ग्रहण लग रहा है। परिणय सूत्र में बंधे युवक-युवती इसके लिए एक-दूसरे को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
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डबवाली के सिविल अस्पताल में बने एड्स कंट्रोल यूनिट में पिछले दो सालों से ऐसे कई मामले आ रहे हैं, जिसे देखकर यूनिट भी हैरान है। आंकड़ों की बात की जाए तो करीब ढाई सौ लोगों की जांच पर एक एचआईवी (एड्स) पॉजीटिव मिल रहा है।

गर्भवती होने पर पता चला एड्स है
वर्ष 2013 में एड्स के बीस मामले सामने आए थे। गर्भवती होने के बाद सिविल अस्पताल में पहुंची युवती का एचआईवी टेस्ट किया गया तो वह एचआईवी ग्रस्त मिली।

उसका पति भी एचआईवी पॉजीटिव मिला। यही स्थिति इस बार भी है। अप्रैल 2013 में 258 मरीजों की जांच की गई थी, जिसमें आठ मरीज एचआईवी पॉजीटिव मिले थे।

सभी के सभी दंपति थे। इसी तरह अगस्त तथा अक्तूबर माह में चार-चार एचआईवी पॉजीटिव दंपति मिले थे। जनवरी से 30 नवंबर 2013 तक मरीजों की संख्या 20 थी।

वर्ष 2014 में भी यही स्थिति है। जनवरी से 30 नवंबर 2014 तक के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो प्रति माह करीब ढाई सौ लोग जांच करवाने के लिए सिविल अस्पताल में पहुंचे हैं। इस दौरान नौ एड्स रोगी मिले हैं, जिनमें अधिकतर दंपति हैं।
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वर्ष 2013 की स्थिति
-------------------------
जनवरी 00
फरवरी 00
मार्च 01
अप्रैल 08
मई 02
जून 00
जुलाई 00
अगस्त 04
सितंबर 00
अक्तूबर 04
नवंबर 01
कुल 20


वर्ष 2014 की स्थिति
जनवरी 02
फरवरी 01
मार्च 00
अप्रैल 02
मई 00
जून 00
जुलाई 00
अगस्त 00
सितंबर 01
अक्तूबर 03
नवंबर 02
कुल 11

बच्चे को बचाने की होती है कवायद
एचआईवी पॉजीटिव मिलने पर गर्भवती महिला को रोहतक रेफर कर दिया जाता है। रोहतक में उपचार के दौरान बच्चे को बचाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। स्थानीय अस्पतालों में यह सुविधा नहीं है।

डिलीवरी के समय स्टाफ रहता है सचेत
सरकारी अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी एमके भादू ने बताया कि प्रसव के समय गर्भवती महिला की डिलीवरी स्थानीय अस्पताल में की जाती है।

इस दौरान होने वाली इंफेक्शन से बचने के लिए तमाम इंतजाम होते हैं। एक विशेष किट स्टाफ को मुहैया करवाई जाती है, जिसका प्रयोग केवल एक बार होता है।

वहीं, डिलीवरी से करीब आधा घंटा पहले महिला को टेबलेट दी जाती है। डिलीवरी के तुरंत बाद बच्चे को सिरप दी जाती है, ताकि बच्चे को इंफेक्शन से बचाया जा सकें।
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उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले एचआईवी पॉजीटिव की संख्या में कमी आई है। एड्स के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
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