उपायुक्त कार्यालय के सामने भट्ठा मजदूरों के अनशनस्थल पर एक धरनारत गर्भवती महिला ने सोमवार रात बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद मौके पर आई गाड़ी में जच्चा-बच्चे को अस्पताल ले जाया गया। बृहस्पतिवार कोे महिला फिर से अपने नवजात बच्ची को लेकर धरने पर बैठ गई।
वहीं, मजदूरों का कहना है कि प्रशासन और भट्ठा मालिक उनकी बात नहीं सुन रहे। जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएगी, वे धरने पर बैठे रहेंगे। जिलेभर के ईंट भट्ठा मजदूर लगभग दस दिन से लघु सचिवालय स्थित उपायुक्त कार्यालय के सामने अनशन पर बैठे हैं।
कुछ मजदूरों ने अपने परिवार के साथ लघु सचिवालय में ही डेरा डाला हुआ है। दस मार्च की रात को धरनारत मजदूर सितारा देवी को प्रसव पीड़ा होने लगी। सितारा देवी के पति तसुब्बर ने बताया कि रात को कोई भी सहायता नहीं करने आया। साथी मजदूर महिलाओं की सहायता से अनशनस्थल पर उसकी पत्नी की डिलीवरी हुई।
बच्ची के जन्म के बाद एक गाड़ी आई जिसमें बैठकर वह पत्नी को अस्पताल में ले गया। तसुब्बर गांव रंगड़ी स्थित ईंट भट्ठे में काम करता है और उत्तरप्रदेश के जिला शाहजहांपुर का निवासी है।
प्रशासन ने नहीं दिया बिल्कुल ध्यान
ईंट भट्ठा मजदूर यूनियन के नेता कामरेड रमेश ने कहा कि दस दिन से मजदूर धरने पर बैठेे हैं, लेकिन कोई अधिकारी और भट्ठा मालिक झांकने तक नहीं आया। यदि ऐसा होता तो उन्हें पता होता कि एक गर्भवती महिला धरने पर बैठी है और उसे अस्पताल में भर्ती करवाने का प्रयास किया जाता। यह प्रशासन और भट्ठा मालिकों का अमानवीय रूप दिखाता है। मजदूर मूलभूत सुविधाएं ही मांग रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं दी जा रही।
वार्ता हो चुकी है विफल
बुधवार को प्रशासनिक अधिकारियाें और भट्ठा संचालकों की बैठक में बात सिरे नहीं चढ़ पाई। भट्ठा संचालकों ने मजदूरों की सभी बातों पर सहमति नहीं प्रदान र्की। इंट भट्ठा एसोसिएशन के जोनल प्रधान भीम झूंथरा का कहना है कि वे सर्भी इंट भट्ठों पर सुविधाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं के बारे में वे कुछ नहीं कर पाते। भट्ठा मालिकों की जल्द ही दोबारा बैठक होगी।