पिछले करीब दो हफ्तों से मंडी में धान लेकर बैठे किसानों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया। किसान जब अपनी समस्या सुनाने के लिए आ रहे थे तब मार्केट कमेटी कार्यालय का दरवाजा भी बंद कर दिया गया।
जिसके बाद किसान भड़क गए और सचिव से भिड़ते हुए भीतर प्रवेश किया। जब अधिकारियों की तरफ से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला तो एसडीएम को रोककर धरने की चेतावनी दे दी। किसानों के बढ़ते विरोध के बीच एसडीएम गाड़ी लेकर खिसक गए।
एसडीएम सुरेश कस्वां मार्केट कमेटी कार्यालय में पहुंचे। कमेटी अधिकारियों, कर्मचारियों सहित शैलर मालिक तथा आढ़तियों से बातचीत करने लगे।
पिछले कई दिनों से धान लेकर अनाज मंडी में बैठे किसान कुलविंद्र सिंह, सुरजीत सिंह, बलकरण सिंह, गुरमीत सिंह, पाला सिंह, तेजा सिंह, जगसीर सिंह, इकबाल सिंह के नेतृत्व में कार्यालय में आ गए।
काफी देर तक बाहर खड़े रहे किसानों ने बैठक में प्रवेश करके एसडीएम सुरेश कस्वां को समस्या बतानी चाही, लेकिन सचिव के कार्यालय का दरवाजा बंद कर दिया गया।
चाय की चुस्कियां भर रहे अधिकारियों को दरवाजे पर खड़े धरती पुत्रों की जरा सी भी फिक्र नहीं हुई। आखिरकार विरोध बढ़ने पर सचिव दिलाबर सिंह बैनीवाल किसानों को समझाने के लिए पहुंचे।
किसान विरोध जताते हुए बैठक में घुस गए। किसानों ने कहा कि वे पिछले पंद्रह दिन से अपना धान लेकर मंडी में बैठे हैं। उनके पास एक बार भी बोली नहीं पहुंची।
कुछ आढ़ती उन्हें कम दाम पर धान बेचने को मजबूर कर रहे हैं। क्या यह सही है? खरीद एजेंसियों तथा शैलर मालिकों ने कहा कि अगर तापमान सही है, तो फिर क्या हुआ, दाना डैमेज है। एसडीएम ने उनकी हां में हां मिला दी। किसान बैठक का बहिष्कार करके बाहर आ गए।
एसडीएम को घेरकर धरने की दी चेतावनी
बैठक खत्म करके बाहर आए एसडीएम सुरेश कस्वां को किसानों ने रोक लिया। किसानों ने कहा कि अगर खरीद शुरू नहीं हुई तो वे धरना लगा देंगे। एसडीएम ने पलटकर जवाब दिया कि धरने से मसले हल नहीं होते। अगर हल होना होता तो आप पहले दिन ही धरना दे देते।
इधर खरीद नहीं, उधर भीगा धान
एक तरफ धान की खरीद नहीं हो रही। दूसरी ओर मंडी में पड़ा धान बुधवार की सुबह आई बारिश में भीग गया। जिससे प्रबंधों की पोल खुल गई।
गांव पन्नीवाला मोरिकां के किसान मनप्रीत ने बताया कि उसने आढ़ती के कहने पर 1200 रुपये में धान बेचा है। चूंकि पंद्रह दिन तक उसके पास बोली लेने के लिए कोई नहीं आया।
आढ़ती ने कहा कि धान बेचना है तो उसे 1200 रुपये प्रति क्विंटल की दर से देना होगा। किसानों ने सवाल खड़ा किया कि अगर 1450 रुपये में उनके धान को रिजेक्ट किया जाता है। तो फिर उसी धान को 1200 रुपये में कैसे खरीद लिया जाता है?
डबवाली में शैलर मालिकों की क्षमता लगभग पूरी हो चुकी है। उपायुक्त से क्षमता बढ़ाने की मांग की जाएगी। किसानों के एक-एक दाने की खरीद की जाएगी। मैंने किसानों को समझाया है कि धरने से मसला हल नहीं होता।
सुरेश कस्वां, एसडीएम, डबवाली