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गेहूं की क्वालिटी के कारण लौटे ट्रकों पर भड़के आढ़ती, हड़ताल करके जताई नाराजगी

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दी कालांवाली को-ओ मार्केटिंग कम प्रोससिंग सोसाइटी लिमिटेड कालांवाली के कार्यालय के समक्ष नारेब? - फोटो : Sirsa
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कालांवाली। भारतीय खाद्य निगम की ओर से गेहूं से लदे ट्रक अनाज मंडी में वापस भेजने पर शनिवार को आढ़तियों ने एकत्रित होकर रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान कविश गर्ग, न्यू आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान प्रदीप जैन और कच्चा आढ़ती एसोसिएशन के उप प्रधान गुरजीत शर्मा के नेतृत्व में डोर टू डोर दुकानों पर जाकर गेहूं ही लोडिंग और खरीद बंद करने की अपील की।
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पहले आढ़तियों ने दी कालांवाली को-ओ मार्केटिंग कम प्रोसेसिंग सोसायटी लिमिटेड कार्यालय के समक्ष सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी कर रोष प्रदर्शन किया। इसके बाद खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और मार्केट कमेेटी कार्यालय में धरना देकर नाराजगी व्यक्त की।
आढ़तियों प्रधान कविश गर्ग, प्रदीप जैन, पूर्व मार्केट कमेटी वाइस चेयरमैन ओमप्रकाश वाजपेयी, विनोद मित्तल, सुरेंद्र नेहरू, लक्की ठेकेेदार, महेश आजाद, राजकुमार, सुखराम ने बताया कि मार्च के महीने में ही गर्मी अधिक पड़ने से इस बार गेहूं के दाने मुरझाए और टूटे हुए हैं। यह प्राकृतिक विपदा है। खाद्य निगम ऐसी गेहूं के ट्रक वापस आढ़तियों के पास भेज रहा है। जबकि खरीद एजेंसियों ने खुद गेहूं की जांच कर खरीद की है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से फसलों के रुपये किसानों के खातों में सीधे जा रहा है। फिर ट्रक उनके पास क्यों भेजे जा रहे हैं। एक ट्रक गेहूं का वापस आने से आढ़तियों को किराया दोगुना पड़ रहा है और 15 हजार रुपये किराया खर्च लग रहा है। आढ़तियों का कहना है कि यह किसानों का ही माल है। आढ़ती केवल सर्विस देते हैं। आढ़तियों को ढाई प्रतिशत आढ़त मिलती थी, वह भी कम कर दी गई है। उनका काम है किसान का माल जो मंडी में आता है, उसे साफ, फिलिंग कराना और लोड कराना है। उसकी एवज में सरकार आढ़तियों को 46 रुपये प्रति क्विंटल देती है। जो माल ऑक्शन पर खरीद लिया। जिसका गेट पास कट गया, उसको रिजेक्ट करने का कोई प्रावधान नहीं है। आढ़तियों ने खरीद एजेंसियों को माल दे रखा है। भारतीय खाद्य निगम को सरकार को डिलीवरी देनी है। आढ़तियों का कोई रोल नहीं है। आढ़तियों ने सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों से मांग की है कि प्राकृतिक तौर पर मुरझाए गेहूं के दाने की 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत तक क्वालिटी कम होने पर भी गेहूं की खरीद की जाए और एफसीआई में माल उतरवाया जाए। अन्यथा माल सीधे किसानों के पास भेजा जाए। क्योंकि उनके खाते में सीधा पैसा आ रहा है। इसके बाद आढ़ती हड़ताल जारी रखने की बात कहते हुए शाम को लौट गए।
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नॉर्मस के अनुसार 6 प्रतिशत से अधिक मुरझाया और टूटा दाना नहीं ले सकते। यदि ऊपर से नए नॉमर्स आते हैं, हम उसके हिसाब से माल उतरवा लेगें। उन्होंने बताया कि 6 प्रतिशत से अधिक मुरझाया व टूटा दाना आदि क्वालिटी की कमी वाले अब तक सिर्फ 15 ट्रक ही लौटाए गए हैं। आढ़तियों की ओर से बिना साफ-सफाई किए माल भेजा जा रहा है, जिसके कारण भी दिक्कत पेश आ रही है।
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-सुरेश सैनी, क्वालिटी कंट्रोलर, भारतीय खाद्य निगम
अभी कहीं बाहर हूं, फिलहाल इस मामले मे अभी बात नहीं कर सकते।
-मेजर सिंह, सचिव, मार्केट कमेटी कालांवाली।
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